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अपराजिता: गांव में पलायन देख गम में डूबी ‘सृष्टि’, फिर इस तरह से पर्दे पर उकेरा अपना दर्द

Tue, 23 Jul 2019 09:25 AM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
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पलायन पर डॉक्यूमेंट्री बनाने वाली सृष्टि - फोटो : अमर उजाला
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अपनी आंखों के सामने अपने गांव टिहरी को डूबता देख ‘सृष्टि’ भावुक थीं और फिर गांवों से हुए पलायन ने पीड़ा को और बढ़ा दिया। सृष्टि ने जो अपनी आंखों से देखा अब वह उसे पर्दे पर लोगों तक पहुंचाने जा रही हैं।

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‘एक था गांव’ डॉक्यूमेंट्री के जरिए वह उन लोगों की कश्मकश व पीड़ा को बताएगी, जिन्हें मजबूरी के चलते अपने गांव छोड़ पड़े और वह जो कुछ गांव में ही छूट गए। इसी के साथ लोगों के लिए कई सवाल भी छोड़ती है। 
 
मूल रुप से नई टिहरी के सेमला गांव की रहने वाली सृष्टि लखेड़ा की पढ़ाई ऋषिकेश में हुई है। इसके बाद दिल्ली यूनिवर्सिटी से फेलोशिप आनर्स करने के बाद सृष्टि ने फिल्म मेकिंग में ओलंपिया वाशिंगटन से कोर्स किया।

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जल्द लोगों के सामने आएगी डॉक्यूमेंट्री

पढ़ाई पूरी करने बाद वह लौट आई। जिस गांव में वह खेली, अपने बचपन में कई साल बिताए, लंबे समय बाद जब उस गांव में लौटी तो गांव की तस्वीर ही कुछ और थी। गांव में केवल सात लोगों को देखा। जबकि कभी यहां लगभग 50 परिवार रहते थे।

अपने गांव की बदली तस्वीर ने सृष्टि को जो पीड़ा पहुंचाई, वहीं उन्होंने अपनी डॉक्यूमेंट्री ‘एक था गांव’ के जरिए दिखाई है। एक घंटे की यह डॉक्यूमेंट्री जल्द ही लोगों के सामने आएगी। डॉक्यूमेंट्री में खासतौर गांव में अकेले रह रही 80 साल की वृद्ध महिला व 19 साल की युवती को फोकस किया गया है।

80 साल की ऐसी वृद्ध महिला, जिसका बच्चे शहर में ही बस गए है, लेकिन वह अपने गांव को छोड़कर नहीं जाना चाहती। वहीं एक 19 साल की युवति जो कुछ करना चाहती है, लेकिन गांव में संसाधन नहीं होने के कारण वह घुट रही है।

दूसरी ओर शहर में बसे परिवार गांव को याद तो करते है, लेकिन अपनी मजबूरी के चलते वह लौट नहीं सकते। गांव छोड़ते और लौटने के बारे में सोचते वक्त भी वह कश्मश में होते है। फिल्म सितंबर-अक्तूबर में रिलीज होगी। 
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महिलाओं ने ही संभाला है पहाड़ 

सृष्टि बताती है कि पहाड़ महिलाओं से ही बचा है। गांव में महिलाएं ही अकेले रह रही हैं। बतौर सृष्टि यह स्थिति केवल एक गांव के नहीं बल्कि उत्तराखंड के हर गांव में है। गांव में पुरुषों की तुलना में महिलाएं ही अधिक मिलेंगी। 

फिल्म फेस्टिवल और उत्तराखंड के लोगों को दिखाएंगी फिल्म
सृष्टि ने बताया वह और उनकी टीम यह फिल्म सबसे उत्तराखंड के लोगों और फिल्म फेस्टिवल में दिखाएंगी। कहा कि पलायन की पीड़ा को हम सभी समझते है और इनके कारणों से भी हम सभी वाकिफ है, लेकिन अपने स्तर पर हम सभी को प्रयास करने होंगे।  सृष्टि का कहना है कि ये कोई बॉलीवुड की कहानी नहीं है, ये रियालिटी है। हम सब जूझ रह पलायन की समस्या से। 
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