सोमवार को अपरा एकादशी का स्नान पर्व पड़ रहा है। इस दिन देश के विभिन्न भागों से आए श्रद्धालु एकादशी व्रत रखकर गंगा मैया और लक्ष्मी नारायण की पूजा अर्चना करेंगे। एकादशी से ज्येष्ठ पूर्णिमा तक 20 दिनों स्नानार्थियों की सर्वाधिक भीड़ गंगा तट पर उमड़ने वाली है। चारधाम यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं की संख्या भी लगातार बढ़ती जाएगी।
एकादशी से 25 मई तक स्नानार्थियों के मेले चलेंगे। 25 मई को वट सावित्री व्रत और बड़मावस का लक्खी स्नान आयोजित किया जाएगा। इसके लिए अभी से विभिन्न प्रांतों के श्रद्धालुओं का आगमन प्रारंभ हो गया है। चूंकि शिक्षण संस्थाओं में अवकाश भी हो रहे हैं।
अत: यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालु भी काफी संख्या में पहुंचने लगे। इस बार रविवार को आने वालों में अधिकांश यात्रा पर जाने वाले तीर्थयात्री हैं। बहुत से तीर्थयात्री चार जून को पड़ने वाले गंगा दशहरा और पांच जून की निर्जला एकादशी के लिए यात्रा से लौट आएंगे। ऐसे श्रद्धालुओं की संख्या भी कम नहीं जो बड़मावस का स्नान करने के बाद यात्रा पर जाएंगे।
बड़मावस पर चूंकि पितरों के निमित्त भी श्राद्ध तर्पण किए जाते हैं, अत: पितृ शांति कराने वालों की संख्या काफी रहेगी। दशहरे के बाद नौ जून को पूर्णिमा तक सर्वाधिक भीड़ रहने के आसार हैं।
ज्येष्ठ मास के नौ जून को हो रहे समापन के साथ ही स्नान पर्वों पर कुछ दिनों के लिए भले ही विराम लग जाए, किंतु यात्रा अनवरत जारी रहेगी। जून में सभी जगह अवकाश के चलते प्रति दिन भीड़ बढ़ेगी। इस महीने में बद्री और केदार जाने वालों की संख्या एकाएक इसलिए भी बढ़ती है, क्योंकि बंगाल और उड़ीसा से दो धाम के लिए अधिक तीर्थयात्री पहुंचते हैं।
जैसे ही मानसून आएगा, देश के समुद्र तटीय इलाके से मछुवारों की यात्रा बड़े पैमाने पर निकलने लगेगी। मानसून आने के बाद मछुवारे बरसात के दिनों में कम संख्या में समुद्र में जाते हैं।