गांधी जयंती से इस बार भी पंचायतों में हर घर का दरवाजा खटखटाने की भी शुरुआत कर दी गई है। 31 दिसंबर तक के इस सर्वे में यह भी सामने आ जाएगा कि अब तक पंचायतों में कितना काम हुआ और पंचायतों को और क्या जरूरत है।
केंद्र सरकार ने दो साल पहले हर साल अंत्योदय सर्वे कराने की शुरुआत की थी। इस सर्वे के तहत सभी संबंधित विभाग ग्राम पंचायतों में यह देखते हैं कि पंचायतों में एक साल के अंदर क्या काम हुआ और अभी क्या काम होने बाकी हैं।
मसलन पिछले सर्वे में ही यह उभर कर सामने आया था कि गांवों तक प्रदेश में बैंकों की पहुंच बहुत कम है। कई गांवों के लोगों को बैंकों तक पहुंचने में 20-20 किलोमीटर तक की दूरी तय करनी पड़ती है। इसी तरह से अन्य योजनाओं का खाका भी इस सर्वे के तहत प्रदेश की 7500 से अधिक पंचायतों में खींचा जाता है।
पंचायतों की रैंकिंग भी बनती है इस सर्वे के जरिये
इस योजना का एक महत्वपूर्ण पहलू पंचायतों की रैंकिंग का भी है। ग्राम्य विकास विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक रैंकिंग से ही तय होता है कि पंचायत का काम कितना बेहतर है।
छूटे हुए कामों की होती है भरपाई
सर्वे में लोगों से बातचीत और अन्य तरीकों से पड़ताल के बाद यह भी तय किया जाता है कि किस गांव को किस तरह की योजना की जरूरत है। दो अक्तूबर से प्रदेश में ग्राम विकास योजनाओं के प्रस्ताव तैयार करने का काम भी शुरू कर दिया गया है। यह काम भी दिसंबर तक पूरा होगा। सर्वे में निकलकर आने वाली कमी की भरपाई फिर ग्राम विकास योजनाओं के जरिये की जाती है।
अंत्योदय सर्वे का काम प्रदेश में शुक्रवार से शुरू कर दिया गया है। केंद्र सरकार से मिले दिशा निर्देश के तहत सर्वे 31 दिसंबर तक पूरा किया जाना है। इस सर्वे से यह भी खुलकर सामने आएगा कि विभागीय योजनाओं को किस तरह से ग्राम पंचायतों में लागू किया जाए।
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हरि चंद्र सेमववाल, सचिव पंचायत