बोर्ड और यूनिवर्सिटी दोनों की परीक्षाएं इस वक्त चल रही हैं। परीक्षा के वक्त 15 साल के सात्विक को सिरदर्द की समस्या हो जाती है। डॉक्टर का कहना है कि ऐसा स्ट्रेस की वजह से होता है। वह उसे स्ट्रेस की दवा तजवीज करते हैं तो इस दवा का इस्तेमाल उसके पिता नवीन नौटियाल भी अपने व्यवसाय से उपजे तनाव को दूर करने से नहीं चूकते...।
सात्विक और नवीन आज की हकीकत हैं। बच्चों को पढ़ाई का दबाव मार रहा है तो बड़ों को अपने काम और व्यवसाय का। यही वजह है कि 12 साल के बच्चे से लेकर 40 साल के वयस्क तक हर कोई डिप्रेशन नाम की बीमारी के शिंकंजे में है।
मौसम कोई भी हो, शहर में सबसे ज्यादा बिक्री तनाव एंटी स्ट्रेस दवाओं की हो रही है। दून के तकरीबन सौ थोक दवा विक्रेताओं की बात करें तो इन्हीं का सालाना कारोबार 50 करोड़ से ऊपर ठहरता है। दवाओं की कुल बिक्री में 60 प्रतिशत हिस्सा इन्हीं एंटी स्ट्रेस दवाओं का है। साल-दर-साल इसमें बढ़ोत्तरी ही हो रही है।
हर्बल मार रहा जोर
एंटी स्ट्रेस दवाओं के खरीददारों की बात करें तो उनमें भी इन दिनों हर्बल लेने वालों का आंकड़ा जोर मार रहा है। हर्बल दवाओं के नाम पर अश्वगंधा, ब्राह्मी जैसी दवाएं, सीरप लेने वाले कम नहीं।
डॉक्टर के प्रेसक्रिप्शन के बगैर इस तरह की दवाएं नहीं बेची जातीं। परीक्षा के वक्त बच्चों को तनाव बेहद आम है।
-नीरज जैन, केमिस्ट एसोसिएशन
एंट्री स्ट्रेस दवाओं के नाम पर धोखा
एंट्री स्ट्रेस दवाओं के नाम पर धोखा है। इनके काउंटरों का बड़ा बाजार है। मेरी नजर में ऐसी कोई दवा है ही नहीं। इसके स्थान पर परीक्षार्थियों और अन्य लोगों को अपनी जीवन-शैली का ख्याल रखना चाहिए। वक्त पर खाना, सोना, आराम यह सब उसके लिए अधिक लाभकारी है।
-डा. नंदकिशोर, वरिष्ठ मनोचिकित्सक
इनकी सबसे ज्यादा बिक्री
लैंथ्रेक्स, लाइपाजोनम, डायजोपाम, ओलिंजा-3, सिप्ला