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बाघों के संरक्षण को उत्तराखंड में चलेगा एंटी पोचिंग अभियान

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देहरादून। सरकार की तमाम कोशिशों के बाद भी देश के तमाम हिस्सों में बाघों की मौत के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। इसके देखते हुए राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) ने उत्तराखंड सहित देश के तमाम अभयारण्यों में अगले एक माह तक एंटी पोचिंग अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। इसके तहत विशेष तौर पर बाघों के शिकार में इस्तेमाल किए जाने वाले खड़के, फंदे और दूसरे तरीकों की खोजबीन को सर्च आपरेशन चलाया जाएगा। एनटीसीए के वन उप महानिरीक्षक राजेंद्र जी. गरवाड़ की ओर से इस संबंध राज्य वन विभाग को आदेश जारी किए गए हैं।
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एनटीसीए का पत्र मिलने के बाद मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक डॉ. पराग मधुकर धकाते की ओर से इस संबंध में प्रदेशभर के अभयारण्यों में विशेषकर संवेदनशील क्षेत्रों में एंटी पोचिंग अभियान चलाने के निर्देश जारी किए गए हैं। इसके तहत अगले एक माह तक बाघ को फंसाने में इस्तेमाल किए जाने वाले कड़के और फंदों की खोज को विशेष अभियान चलाया जाएगा। इसके अलावा कुछ जगहों पर नंगी तारों में करंट छोड़कर भी शिकार किया जाता है, इनकी भी खोज की जाएगी। इसके अलावा गश्त बढ़ाने के भी निर्देश जारी किए गए हैं। इसके अलावा सूचना तंत्र को मजबूत करने, वाइल्डलाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो और अन्य प्रदेशों के एंटी पोचिंग सेल से संपर्क स्थापित करने के भी निर्देश जारी किए गए हैं। ताकि शिकारियों तक आसानी से पहुंचा जा सके।
राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) की एक रिपोर्ट के मुताबिक देशभर वर्ष 2021 में देशभर में कुल 126 बाघों की मौत हुई। इनमें 60 मौत अवैध शिकार, सड़क हादसों और इंसानों के साथ संघर्ष में हुई हैं। वर्ष 2021 में मध्य प्रदेश में सर्वाधिक 42 बाघों की मौत हुई। दूसरे नंबर पर महाराष्ट्र में 26, कर्नाटक में 15, यूपी में नौ बाघों की मौत हुई है। उत्तराखंड में जून 2021 तक के आंकड़ों के अनुसार यहां कुल छह बाघों की मौत हुई है। इनमें दो बाघ आपसी संघर्ष, तीन की स्वभाविक मौत, जबकि एक बाघ सड़क दुर्घटना में मारा गया। अच्छी बात यह है कि बीत वर्ष प्रदेश में बाघ के शिकार का एक भी मामला सामने नहीं आया है।
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