देश-विदेश में बिजनेस और मैनेजमेंट कंपनियों में काम करने वाले अनूप नौटियाल का नाम प्रदेश में तब सुर्खियों में आया था जब वे वर्ष 2008 में राज्य की तत्कालीन भाजपा सरकार की अति महत्वाकांक्षी योजना 108 आपातकालीन एंबुलेंस सेवा के स्टेट हेड बनाए गए थे।
निशंक सीएम बने तो सत्ता के गलियारों में नौटियाल की सक्रियता बढ़ने की चर्चाएं रही। चर्चा तो यह भी बहुत रही कि प्रदेश सरकार उन्हें स्वास्थ्य सलाहकार बना सकती है। इसके बाद नौटियाल ने राजनीतिक पारी शुरू करते हुए 2014 के लोक सभा चुनाव में टिहरी संसदीय क्षेत्र से भाग्य आजमाया, लेकिन नरेंद्र मोदी की लहर में वे चुनाव हार गए।
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से प्रभावित होकर आम आदमी पार्टी में शामिल हुए। कुछ ही महीने बाद भ्रष्टाचार की खिलाफत करने और उत्तराखंड के मुद्दों पर ‘आप’ के बड़े नेताओं का साथ न मिलने पर ‘आप’ को बाय-बाय कर दिया। अब वे कैंट विधानसभा सीट से संभावित निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में ताल ठोकते नजर आ रहे हैं। नौटियाल से अमर उजाला के सीनियर रिपोर्टर मनीष चंद्र भट्ट ने तीखे सवाल किये, जिनका उन्होंने बेबाकी से जवाब दिया। आप भी पढ़िए, क्या कह रहे हैं वो-
सवाल- आम आदमी पार्टी को बाय-बाय करने की क्या वजह रही?
जवाब- आप के एजेंडे में उत्तराखंड को कोई नामोनिशान नहीं था। मेरे लिए उत्तराखंड के मुद्दे और सरोकार सबसे बड़ा है। भ्रष्टाचार के कई मुद्दों को जिन्हें हमें और हमारी टीम ने उठाया, उन्हें भी हतोत्साहित करने का काम किया। ऐसा लगा कि दिल्ली का नेतृत्व भी भ्रष्ट अधिकारियों के साथ पूरी तरह लिप्त है।
सवाल - बिजनेस और मैनेजमेंट से जुड़ी मोटी पगार की नौकरी छोड़कर, अचानक राजनीति में, क्या यहां ज्यादा मलाई नजर आई?
जवाब - नहीं ऐसा नहीं है। उत्तराखंड में 108 आपातकालीन सेवा के स्टेट हेड के कार्यकाल में मुझे लगा कि इस राज्य में बहुत कुछ करने की आवश्यकता है। जनता से सीधे सरोकार और राजनीति इसका बड़ा माध्यम हो सकता है।
सवाल- इस वक्त उत्तराखंड के सियासी हालात कैसे लगते हैं?
जवाब- दुर्भाग्य से भाजपा और कांग्रेस की सरकारों ने उत्तराखंड को गुड गर्वर्नेंस में सबसे निचले पायदान और भ्रष्टाचार में सबसे ऊपर पहुंचा दिया है।
सवाल - यानी कि तीसरा विकल्प, लेकिन तीसरे विकल्प पर जनता क्यों भरोसा करे?
जवाब - दुर्भाग्यपूर्ण तथ्य यह भी है कि राज्य में ईमानदार और सशक्त तीसरा विकल्प उभरकर सामने नहीं आ पाया है। जो लोग अभी तक जीतकर आये भी हैं वह जनता का विश्वास नहीं जीत पाये। ये लोग जनता की लड़ाई लड़ने के बजाय जिनकी भी सरकार प्रदेश में आई सत्ता की मलाई उड़ाने के लिये उन्हीं के साथ शामिल हो लिये।
सवाल - आप पहले आम आदमी पार्टी में पूरे प्रदेश में सियासी वजूद बनाने की कोशिश में थे, अचानक संभावित निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में कैंट सीट पर सिमटने की वजह?
जवाब - स्वाभाविक है कि 70 में से कोई विधानसभा सीट चुननी थी। हमारी टीम ने निर्णय लिया कि कैंट से शुरूआत की जाय। भले ही हम कैंट से लड़ रहे हैं, लेकिन हमारी सोच पूरे राज्य को लेकर है। जीता तो विधानसभा में पहले कैंट, देहरादून शहर और फिर राज्य हित के मुद्दे उठाऊंगा।
सवाल - आप पर आरोप है कि आप चुनाव के समय ही सक्रिय होते हैं?
जवाब - यह बात बिल्कुल असत्य है। चाय बागान का इश्यू हो, प्रदेश भर में संकल्प यात्रा हो ऊर्जा निगम के घोटालों की बात हो, ऐसे तमाम मुद्दों को लेकर मैं अपनी टीम के साथ हमेशा जनता के बीच सक्रिय रहा हूं। ऐसी भ्रामक बातें फैलाने वाले भी भाजपा कांग्रेस ही लोग हैं।
सवाल - आप पर आरोप है कि टीम भावना के बजाय मनमर्जी से फैसले लेते हैं।
जवाब - यह झूठी बातें भी भाजपा कांग्रेस के लोग फैला रहे हैं। हमने तो पूरे जीवन में लोगों के साथ रहकर काम किया है। 108 इसका स्वर्णिम उदाहरण है। जिसे स्थापित कराने में मेरा और मेरे जुझारू साथियों के टीम वर्क का भी बहुत बड़ा योगदान रहा।
सवाल - आप पर यह भी आरोप लगते हैं कि आप भ्रष्टाचार और जन मुद्दों को उठाते हैं, लेकिन उन्हें ठंडे बस्ते में डाल देते हैं?
जवाब - बस्ते की बात तो सिर्फ कांग्रेस भाजपा जैसे दलों के लोग करते हैं जो शराब माफिया, जमीन माफियागिरी कर पैसा लेने बैग और बस्ते लेकर चलते हैं। चाय बागान का ही उदाहरण ले लें। हमारी टीम ने इसे बचाने के लिये निर्णायक लड़ाई लड़ी। हमने सरेआम चौराहों पर यह बात कही है कि यह कांग्रेसी दामाद की जमीन है और मुख्यमंत्री हरीश रावत अपनी कुर्सी बचाने के लिये इसे खुर्दबुर्द करना चाहते थे। छोटी-छोटी बातों पर यात्रायें करने वाली भाजपा भी इसे लेकर चुप थी। हमें तो ऐसा लगा कि भाजपा की भी इसमें पार्टनरशिप है। जहां तक ऊर्जा निगम के घोटालों का सवाल है तो हमने सीबीआई या विजिलेंस जांच की बात जोरशोर से उठाई। केंद्र में भाजपा की सरकार के अधीन सीबीआई और राज्य में विजिलेंस कांग्रेस सरकार के अधीन है। क्यों नहीं भाजपा कांग्रेस इसकी निष्पक्ष जांच करा देती है।
सवाल - आपका आशय है कि दोनों दलों में भ्रष्टाचार पर आपसी समझौता है?
जवाब - भाजपा-कांग्रेस दो सगे नटखट भाइयों की तरह हैं। इनकी मांजी मां लक्ष्मी है। ये भाई दिन को लड़ते हैं और रात को साथ में लक्ष्मी जी के पास जाते हैं।
सवाल - डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक के नजदीकी के नाते आप जीते या हारें अंतत्वोगत्वा आपको जाना उन्हीं के पाले में है ?
जवाब - 108 आपातकालीन सेवा के स्टेट हेड रहने के दौरान मेरा तब के सीएम निशंक, हेल्थ मिनिस्टर, अफसरों के साथ मिलना जुलना रहता था। इसे लेकर लोग कुछ नेताओं से मेरी करीबी को जोड़ते हैं। अब इसे विरोधी दल भी फैला रहे हैं। मैं जनता को स्टांप पेपर में लिखकर दूंगा कि विधायक बना तो भाजपा कांग्रेस या किसी दल की सरकार में शामिल नहीं हूंगा।
सवाल - कैंट से भाजपा और कांग्रेस के बड़े नेता ताल ठोकेंगे। आप में ऐसी क्या बात है कि निर्दलीय प्रत्याशी अनूप नौटियाल को मतदाता वोट दें?
जवाब- जनसंपर्क में एक बात निकलकर सामने आ रही है कि कैंट और राज्य की जनता नया विकल्प, बदलाव चाहती है। मेरी शैक्षिक योग्यता, ट्रैक रिकार्ड जैसा है, हम कभी शराब के व्यापार, किसी की जमीन हथियाने, खनन या शरीफ लोगों को धमकाने वालों के साथ नहीं जा सकते।