अंकिता की गुमशुदगी रिपोर्ट दर्ज करने में की थी आनाकानी
जांच में पता चला है कि पुलिस ने अंकिता की गुमशुदगी रिपोर्ट दर्ज करने में आनाकानी की। घटना के 72 घंटे के बाद रिपोर्ट दर्ज हुई। यह तथ्य भी सामने आया कि रिजाॅर्ट में मौजूद एक वीआईपी को विशेष सेवा देने से इन्कार करने पर रिजार्ट के मालिक ने अपने दो कर्मचारियों की मदद से हत्या को अंजाम दिया। मुख्य आरोपी पुलकित का पिता विनोद आर्य भाजपा सरकार में दर्जाधारी मंत्री रहा है। उसका सत्ता से सीधा संबंध रहा है, इसीलिए शुरूआत से ही इस मामले में प्रशासन और पुलिस की भूमिका संदिग्ध रही।
संगठन के तर्क
-एसआईटी दबाव में काम कर रही है, इसलिए सीबआई से जांच कराई जाए।
-पोस्टमार्टम रिपोर्ट में डूबने को मौत का कारण बताया गया है। उसके साथ बलात्कार हुआ या नहीं, किसी तरह की ज्यादती हुई या नहीं इस बात की जांच नहीं की गई।
- हत्याकांड में एक वीआईपी के शामिल होने की बात बार-बार सामने आ रही थी, लेकिन पुलिस ने इस संबंध में जांच करने की जरूरत नहीं समझी।
- सभी कार्यस्थलों में महिलाओं की सुरक्षा के लिए विशाखा गाइडलाइन लागू किए जाने के निर्देशों के बावजूद उत्तराखंड में पर्यटन क्षेत्र में इसे लागू नहीं किया गया है।
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हजारों महिलाओं को इस तरह के हादसों से गुजरना पड़ता है
महिला मंच की ओर से दिल्ली प्रेस क्लब में आयोजित कार्यक्रम में महिलाओं ने कहा अंकिता की तरह देशभर में हजारों, लाखों महिलाओं को रोज इस तरह के हादसों से गुजरना पड़ता है। अंकिता भंडारी के लिए न्याय का संघर्ष महिला अधिकारों के सशक्तीकरण के लिए एक जरूरी कदम है। कार्यक्रम में सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठ अधिवक्ता वृंदा ग्रोवर, एडवा नेत्री जगमति सांगवान, कविता कृष्णन, कविता श्रीवास्तव, मैमूना मुल्ला, उमा भट्ट, मल्लिका विर्दी आदि मौजूद रहीं।