बचाव पक्ष के तर्क और आपत्तियां
- यदि कोई वीआईपी है जिसके बारे में पुलिस जानना चाहती है तो क्या उसको आरोपी बनाया गया है? यदि मुकदमा दर्ज है तो कौन सी धाराओं में? पुलिस ने यह भी स्पष्ट नहीं किया है।
- नार्को और पॉलीग्राफ दोनों अलग प्रकृति के टेस्ट हैं। पुलिस ने यह स्पष्ट नहीं किया कि किस जानकारी के लिए नार्को टेस्ट कराना चाहते हैं। बिना इस जानकारी के सहमति देना मुश्किल है।
- पुलिस ने लिखा है कि वीआईपी के संबंध में जानकारी छुपाई जा रही है। साथ ही पुलकित के मोबाइल का भी पता नहीं चला है। ऐसे में पुलिस को स्पष्ट करना चाहिए कि कौन सा आरोपी जानकारी छुपा रहा है।
- आरोप पत्र दाखिल कर दिया गया है। ऐसे में अब पुलकित के मोबाइल से क्या जानकारी चाहिए। जबकि, सीडीआर और रिकॉर्डिंग आदि सब पुलिस के पास है। यह कारण भी पुलिस को स्पष्ट करना चाहिए।
पुलिस ने की थी यह मांग
एसआईटी ने छह दिसंबर को अदालत में प्रार्थनापत्र देकर कहा था कि पुलकित, सौरभ और अंकित का नार्को व पॉलीग्राफ टेस्ट कराना जरूरी है। आरोपियों ने वीआईपी गेस्ट की जानकारी छुपाई है। साथ ही पुलकित के मोबाइल की जानकारी भी नहीं दी जा रही है। लिहाजा पॉलीग्राफ और नार्को टेस्ट की अनुमति दी जाए।
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एसआईटी ने वीआईपी का नाम जानने के लिए नार्को टेस्ट की अर्जी दी थी। आरोपियों ने सहमति पत्रों को वापस ले लिया है। अब कोर्ट में इस पर तीन जनवरी को सुनवाई होगी।
-वी मुरुगेशन, एडीजी, लॉ एंड ऑर्डर एवं पुलिस प्रवक्ता