देहरादून। बंगाल निवासी निवेदिता की हत्या के राजदार अंकित के दोस्त और उसके पिता शनिवार को पुलिस की गिरफ्त में आ गए। पूछताछ में उन्होंने खुलासा किया निवेदिता बालकनी से खुद नहीं गिरी बल्कि अंकित ने उसे धकेल दिया था। बाद में अंकित अकेले निवेदिता का शव लेकर उनकी कार से किमाड़ी गया और शव को जलाकर उसे खाई में फेंक दिया। पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर लिया।
मालूम रहे कि 27 जून को निवेदिया का अधजला शव किमाड़ी के जंगलों से मिला था। पुलिस ने परिजनों की सूचना पर निवेदिता के दोस्त अंकित की गिरफ्तारी के बाद उसकी निशानदेही पर बरामद किया था। तब पूछताछ में अंकित बार-बार यह कहता रहा कि निवेदिता खुद बालकनी से गिर गई थी जिससे उसकी मौत हो गई। लेकिन अकेले कार से शव किमाड़ी लेजाकर जलाने और फेंकने की बात पुलिस के गले नहीं उतरी को उन्होंने उस कार का पता लगाया जिससे वह निवेदिता का शव किमाड़ी ले गया था। तफ्तीश में कार उसके दोस्त अनुज नारंग की निकली। पुलिस अनुज नारंग के घर पहुंची। वहां पता चला कि 28 अप्रैल की रात दोनों बाप-बेटे अंकित चौधरी के फ्लैट पर ही मौजूद थे। सारा घटनाक्रम उनके सामने हुआ। अनुज नारंग ने पुलिस को बताया कि निवेदिता उससे नाराज थी। इसी बीच दोनों फ्लैट की बालकनी में चले गए। यहां दोनों के बीच झगड़ा तेज हो गया और अंकित ने उसे धक्का दे दिया। उसे मुंह और नाक से खून निकल रहा था। घायल अवस्था में तीनों निवेदिता को उठाकर ऊपर ले आए। यहां कुछ देर बाद उसकी मौत हो गई। पुलिस ने अनुज नारंग व उसके पिता निवासी दिल्ली रोड, सदर बाजार, सहारनपुर को गिरफ्तार कर लिया है।
अंकित ने कहा था, मैं अकेले ही निपटा दूंगा
गिरफ्तार पिता-पुत्र ने बताया कि निवेदिता की मौत के बाद अंकित के चेहरे पर कोई घबराहट नहीं थी। अंकित ने कहा था कि घबराने की कोई जरूरत नहीं है। मैं अकेला ही इसे निपटा दूंगा। बहुत दिनों से झेल रहा हूं। बस यही कहकर उसने एक चादर में शव लपेटा। इसके बाद हम दोनों की मदद से शव कार में रखवाया। इसके बाद अंकित अकेले ही कार लेकर चला गया।
25 जून को सामने आया था मामला
राजपुर थाना क्षेत्र का यह मामला 25 जून को सामने आया था। निवेदिता के परिजन उसे खोजते हुए देहरादून पहुंचे थे। यहां उन्होंने पुलिस को निवेदिता के दोस्त अंकित चौधरी (निवासी सहारनपुर) का नंबर दिया। इसके आधार पर पुलिस ने जांच करते हुए सूचना वाले दिन ही अंकित को गिरफ्तार कर लिया। अंकित ने पुलिस को बताया कि निवेदिता और वह आपस में बेहद प्रेम करते थे और शादी करना चाह रहे थे। निवेदिता 28 अप्रैल को उसके फ्लैट पर मौजूद थी। दोनों बालकनी में खड़े हुए थे कि इसी बीच निवेदिता नीचे गिर गई। डर के मारे उसने शव को ठिकाने लगा दिया।
दोस्त की जूठी सिगरेट पीने पर गुस्सा हुई थी निवेदिता
-अक्सर होते थे झगड़े, बालकनी में अंकित ने पी थी सिगरेट
देहरादून। अंकित और निवेदिता के झगड़े का रोज की तरह अंत हो गया था, लेकिन दोस्त की जूठी सिगरेट पीने पर निवेदिता आग बबूला हो गई और फिर झगड़ा शुरू हो गया। झगड़ा इतना बढ़ गया कि दोनों में हाथापाई भी हुई। इसी बीच अंकित ने उसे गाली देते हुए जोर से धक्का दे दिया।
दरअसल, अंकित जनवरी में निवेदिता का खुद को पति बताते हुए उसके हॉस्टल से ले आया था। तब से दोनों एक साथ ही रह रहे थे। कभी कभार निवेदिता अपने रूम पर चली जाती थी। बताया जा रहा है कि उनके बीच किसी न किसी बात को लेकर झगड़ा होता रहता था। यह बात अंकित अपने दोस्त अनुज नारंग को भी बताया करता था। उस दिन जब अनुज व उसके पिता वहां आए तब भी दोनों के बीच झगड़ा हो रहा था। अंकित ने निवेदिता को मना भी लिया था। अनुज भी उनके साथ बालकनी में सिगरेट पी रहा था। दोनों के बीच झगड़ा शांत हो गया। इस पर अंकित ने लंबी सांस ली और अनुज के हाथ से सिगरेट लेकर दम लगा लिया। इस पर निवेदिता ने फिर से चिल्लाना शुरू कर दिया। कहा कि उसने जूठी सिगरेट क्यों पी। अंकित ने सिगरेट फेंक दी, लेकिन निवेदिता शांत नहीं हुई। दोनों में झगड़ा बढ़ता गया और अंकित ने उसे बालकनी से धक्का दे दिया।
पुलिस के आगे नहीं टूटा अंकित
अंकित चौधरी का यह अपराध पहला था, लेकिन उसने व्यवहार किसी पेशेवर अपराधी से कम नहीं किया। सब कुछ खुलासा होने के बाद भी वह पुलिस के आगे नहीं टूटा। न्यायिक अभिरक्षा में जाने से पहले तक वह झूठ बोलता रहा। उसी ने यह कहानी बुनी थी कि निवेदिता बालकनी से खुद गिरी थी और वह डर के मारे शव जंगल में जलाने के लिए ले गया था।