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यहां पैदा कम होते हैं और जान ज्यादा गंवाते हैं वन्य जीव

Fri, 05 May 2017 02:55 PM IST
अमरनाथ/ अमर उजाला, हल्द्वानी
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gopalpur zoo
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नैनीताल के उच्च स्थलीय प्राणी उद्यान (जू) में 2016 से मार्च 2017 तक महज एक फाउल जंगल रेड पक्षी पैदा हुआ है, जबकि इसी अवधि में विशेष प्रजातियों के 38 वन्य जीवों ने जान गंवाई है।
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शेडयूल एक से लेकर चार तक और लुप्तप्राय 203 पशु-पक्षियों की पिछले 14 साल में मौत हो चुकी है। हल्द्वानी निवासी प्रमोद अग्रवाल गोल्डी की ओर से सूचना अधिकार के तहत मांगी गई जानकारी से यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है।

जानकारी के मुताबिक नैनीताल जू में  मार्च 2015 में नर रायल बंगाल टाइगर की मौत हो गई थी। तब से रानी नाम की मादा रायल बंगाल टाइगर अकेली है। रानी के प्रायोजक उसके खाने के लिए तीन लाख रुपये खर्च के रूप में देते हैं। इससे पहले 2011 में साइबेरियन टाइगर की जान चली गई थी।
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उसके बाद जू में कभी भी दर्र्शक इस प्रजाति के टाइगर के दीदार नहीं कर सके। दुर्लभ की श्रेणी में आने वाले दो हिम तेंदुओं की भी 2009-10 में जान जा चुकी हैं। उसके बाद कभी हिम तेंदुआ जू में नहीं आ पाए। इसी चिड़ियाघर में 20 मार्च 2015 को पाकिस्तान के राष्ट्रीय मारखोर मादा की मौत हो गई। तब से नर मारखोर अकेला है।

तमाम इंतजाम के बाद भी कुछ दिनों के अंतराल में रोज रिंग पाराकीट या प्लम हेडेड पाराकीट और लव बर्ड जोड़ों की मौत हो गई। संभव है कि मेटिंग सीजन में आपसी लड़ाई में इनकी मौत हुई हो।

इस तरह विभिन्न प्रकार की प्रजातियों की पषु पक्षियों की संख्या 264 अप्रैल-2016 से घटकर अप्रैल 2017 में 233 रह गई है। इस तरह मरने वाले दुर्लभ प्राणियों की तादाद काफी अधिक है, जबकि उनकी जन्म दर बेहद कम है। यह स्थिति तब है जब जानवरों के अंगीकृत करने से तीन साल में तीन गुना से अधिक धनराशि जू को प्राप्त हो रही है और यहां पर वन्यजीवों के लिए रेस्क्यू सेंटर भी है।

यहां पशु-पक्षियों की मौत की मुख्य वजह अधिक उम्र है। मेटिंग सीजन में आपसी लड़ाई में भी करीब 10 प्रतिशत पक्षियों की मौत हो जाती है। जोड़े के जरिए इनकी संख्या बढ़ाने के लिए अंतर्राष्ट्रीय संस्था जिम्स का सहयोग लिया जा रहा है। मारखोर विलुप्तप्राय की श्रेणी में आता है। इसका जोड़ा बनाने के लिए दार्जिलिंग जू से संपर्क साधा गया है। जू में पशु-पक्षियों की प्रजनन दर काफी कम के पीछे खुला वातावरण न होना भी बड़ा कारण है।
- योगेश भारद्वाज, जू चिकित्सक

उत्तर भारत में अनोखा है यह चिड़ियाघर
उत्तर भारत का अकेला उच्च स्थलीय प्राणी उद्यान है जो लगभग 2100 मीटर की उंचाई पर शेर का डंडा हिल में स्थित है। 1995 में लोगों के लिए इसे खोला गया था। इसे सेंट्रल जू अथारिटी की सदस्यता मिली हुई है। करीब 11 एकड़ में यह प्राणी उद्यान फैला हुआ है। पिछले साल रेड पांडा के भी दो बच्चे हुए थे। जू में तीन माह पहले बेतालघाट से एक घायल टाइगर को लाया गया है और इस टाइगर का नाम राजा या बेताल रखने पर विचार किया जा रहा है। 
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पिछले तीन वित्तीय साल में नैनीताल प्राणी उद्यान में दर्षक आए
साल-         संख्या (5-12 साल)        संख्या (12 साल से अधिक)
2014-15        34164            192583
2015-16        38560            239337
2016-17        44276            257014 

जू के जानवरों को अंगीकृत करने पर कौन कितना खर्च कर रहा
जानवर        सालाना खर्च        अंगीकृतकर्ता
रायल बंगाल टाइगर    300000    वन विकास निगम, दून
तेंदुआ        150000    वन विकास निगम, दून
तिब्बती भेड़िया        125000    कूर्मांचल सहकारी बैंक
हिमालयन भालू        50000    जेपी ग्रांड होटल

साल दर साल बढ़ता मौत का सिलसिला
2013- 8
2014-23
2015-27
2016-32
2017 (22 मार्च तक)-6
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