विकासखंड कालसी के सकनी गांव में आंगनबाड़ी केंद्र का भवन निर्माण कई वर्षों बाद भी पूरा नहीं हो सका है। वर्ष 2016-17 में करीब 18 लाख रुपये का बजट स्वीकृत होने के बावजूद भुगतान की जटिल प्रक्रिया के चलते निर्माण कार्य अधर में लटका है। नतीजा यह है कि केंद्र का अपना भवन न होने से बच्चाें को मजबूरी में एक भवन में बैठना पड़ रहा है।
ग्रामीणों की मांग पर शासन ने सकनी में आंगनबाड़ी केंद्र के भवन के लिए 18 लाख रुपये मंजूर किए थे। कार्यदायी संस्था ने एक मंजिला ढांचा तो खड़ा कर दिया, लेकिन उसके बाद काम ठप हो गया। पूर्व प्रधान सुरेंद्र सिंह पंवार ने बताया कि निर्माण राशि का बड़ा हिस्सा मनरेगा के माध्यम से सीधे श्रमिकों के खातों में भेजा जाता है, जिसके चलते कार्यदायी संस्था को भुगतान एकत्र करने में परेशानी आ रही है। नए नियमों की सख्ती से समस्या और बढ़ गई है। विभाग की ओर से संस्था को अब तक करीब सात लाख रुपये ही जारी किए गए हैं, जबकि बजट का शेष एक तिहाई हिस्सा अभी भी लटका है।
खतरे के साये से कार्यकर्ता के घर पहुंचा केंद्र
सकनी का यह आंगनबाड़ी केंद्र वर्ष 2007 से पंचायत घर में संचालित हो रहा था। लेकिन मार्च 2023 में अचानक पंचायत घर की छत का प्लास्टर टूटकर गिर गया। इसके बाद किसी अनहोनी के डर से आंगनबाड़ी कार्यकर्ता ने केंद्र को अपने ही घर में संचालित करना शुरू कर दिया। वर्तमान में इस केंद्र में तीन से छह वर्ष तक के करीब आठ बच्चे पढ़ रहे हैं। अपना भवन न होने से बच्चों के लिए भोजन पकाने और गर्भवती व धात्री महिलाओं को दी जाने वाली पोषण सामग्री के सुरक्षित भंडारण और वितरण में परेशानी हो रही है।
निर्माण कार्य में भुगतान की जटिल प्रक्रिया आड़े आ रही है। हालांकि, इतने लंबे समय में भवन पूरा हो जाना चाहिए था। अधूरा निर्माण जल्द पूरा कराने के लिए कार्यदायी संस्था से पत्राचार किया जाएगा। - कृष्णा जायड़ा, बाल विकास परियोजना अधिकारी, कालसी।