वहीं गीता पिलखवाल और दिव्यांशु नेगी ने इस आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण सहयोग दिया। इन युवाओं की यह पहल सिर्फ मनोरंजन का एक आयोजन नहीं थी बल्कि अपनी मिट्टी, अपनी बोली, अपने संगीत और अपनी संस्कृति को दुनिया के सामने गर्व के साथ रखने की कोशिश थी।
दुबई में गूंजे ये पहाड़ी सुर बता रहे थे कि पहाड़ भले ही हजारों किलोमीटर दूर हो लेकिन उसकी धुनें दिलों तक पहुंचने के लिए किसी दूरी की मोहताज नहीं होतीं। प्रदीप बताते हैं कि यह कोशिश आने वाली पीढ़ी को भी अपनी जड़ों से जोड़ने और पहाड़ी संगीत को देश-दुनिया तक पहुंचाने की एक खूबसूरत पहल है।
आर्मी स्कूल लैंसडाउन से अपनी पढ़ाई करने वाले प्रदीप बताते हैं कि उन्हें पहाड़ी म्यूजिक पर डांस करने का शौक बचपन से रहा है। इसलिए वह अपने डांस के जरिए पहाड़ी संगीत को नए तरीके से लोगों के सामने पेश करते हैं। प्रदीप की एक-एक रील मिलियन में देखी जाती है।
पत्नी के साथ वायरल हुई थी पहली रील
प्रदीप पुंडीर की पहली रील पत्नी के साथ किए गए परफार्मेंस पर वायरल हुई थी। उनकी पत्नी को भी डांस का शौक है। दोनों को एक दूसरे का साथ मिला तो लोगों को ये जोड़ी खूब पसंद आने लगी। बिजुली...हे जी जैसी पहाड़ी गीतों पर प्रदीप को लोगों ने खूब पसंद किया।