उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी की बहुप्रतीक्षित कार्यकारिणी नेताओं के परिवार और हरिद्वार के नेताओं में ही निपट गई। कार्यकारिणी के अधिकतर पद हरिद्वार जिले के छोटे-बड़े नेताओं से भरे गए हैं।
सूची पार्टी सुप्रीमो सोनिया गांधी की रजामंदी से जारी की गई है। लेकिन इसमें पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष यशपाल आर्य के करीबियों का पत्ता साफ हो गया है।
सूची में मुख्यमंत्री हरीश रावत के परिवार और रिश्तेदारों में चार लोग शामिल हैं। पार्टी ने भगवानपुर उपचुनाव में अधिकृत उम्मीदवार को चुनौती देने वाले नेता मास्टर सत्यपाल को भी महासचिव बनाया है। लेकिन एक बात माननी होगी कि नई कार्यकारिणी में युवाओं और महिलाओं को भरपूर भागीदारी मिली है।
10 सदस्यों में 6 हरिद्वार से
करीब दस महीने पहले प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय ने अपनी कार्यकारिणी बनाने के लिए पूरे प्रदेश का दौरा कर सक्रिय नेताओं की खोज की थी। उसके आधार पर देखें तो कुल 110 पदाधिकारियों में हरिद्वार जिले से करीब 25 पदाधिकारी शामिल किए हैं।
कार्यकारिणी के 10 सदस्यों में छह हरिद्वार से ही हैं। हरिद्वार के बाद बड़ी संख्या में देहरादून के पदाधिकारियों को मौका मिला है। कई नाम ऐसे हैं जो देहरादून में रहकर पर्वतीय जिलों की राजनीति कर रहे हैं। जबकि प्रदेश अध्यक्ष ने क्षेत्र में संगठन को मजबूती न देकर देहरादून परिक्रमा करने वाले नेताओं से दूरी बनाने की घोषणा की थी।
कार्यकारिणी में हरीश रावत का दिखा दबदबा
कार्यकारिणी में हरीश रावत की छाप साफ नजर आती है। यशपाल आर्य के समय कार्यकारिणी का आकार 32 का था। यह अब 62 का हो गया है। हरीश रावत के प्रदेश अध्यक्ष रहते कार्यकारिणी बड़ी बनी थी।
पार्टी ने 2012 में पार्टी के खिलाफ बगावत कर विधानसभा चुनाव में उतरे जोत सिंह बिष्ट, मनोहर लाल शर्मा, गोदावरी थापली, महेश शर्मा को भी पुरस्कृत किया है।
पार्टी ने हरीश रावत के बेटे आनंद रावत को महासचिव और बेटी अनुपमा रावत को सचिव बनाया गया है। हालांकि बेटा और बेटी दोनों ही हरिद्वार में सक्रिय राजनीति में जुड़े हैं।
रावत के साले और पूर्व विधायक करण माहरा को महासचिव बनाया गया है। वहीं महासचिव बनाए गए विजय सजवाली को भी रावत का करीबी रिश्तेदार बताया जा रहा है। नारायण दत्त तिवारी के भतीजे मनीषी तिवारी सचिव बनाए गए हैं। जबकि स्व. मनोरमा डोबरियाल शर्मा के बेटे विवेक डोबरियाल शर्मा को भी सचिव पद मिला है।
यशपाल आर्य के करीबियों को लगाया किनारे
यशपाल आर्य की पुरानी कार्यकारिणी और आगे दिखने वाले नेताओं को पूरी तरह किनारे कर दिया गया है। पिछली कार्यकारिणी में सीधे सोनिया गांधी से उपाध्यक्ष पद लाने वाले सूर्यकांत धस्माना को जगह नहीं मिली है। आर्य की कार्यकारिणी के अग्रिम चेहरों में विजय सारस्वत, धीरेंद्र प्रताप और रवींद्र सिंह का नाम भी सूची में नहीं है।
इसके पीछे पार्टी का तर्क है कि कुछ नाम सरकार में शामिल होने के कारण शामिल नहीं किए गए हैं। हालांकि आर्य की कार्यकारिणी में प्रवक्ता के रहते प्रभावशाली रहीं शिल्पी अरोड़ा का कद बढ़ा है। उन्हें महासचिव बनाया गया है। पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा खेमे की धमकी और कोशिशों के बाद जगह नहीं मायूसी मिली है।
इनकी सुनिए
कार्यकारिणी में संतुलन बनाने की कोशिश की गई है। युवाओं को महिलाओं को अधिक महत्व दिया गया है। कुछ नेताओं को सरकार के कामकाज में जोड़ा जाना है। लिहाजा उनके नाम शामिल नहीं हैं। फिर भी कुछ लोग अगर रह जाते हैं उन्हें शामिल करने की इजाजत कांग्र्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने दी है।
-किशोर उपाध्याय, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष
प्रदेश अध्यक्ष और प्रदेश प्रभारी ने सलाह ली थी। मैं संतुष्ट हूं। जो दायित्वधारी हैं उन्हें शामिल नहीं किया गया है। जो नाम मैंने दिए थे उनमें सभी को शामिल कर लिया गया है।
-पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा