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समीकरण गड़बड़ाए, तो फ्रंट पर अमृता रावत, जानें क्या है दावेदारों के प्लान ए, बी और सी

Wed, 15 Mar 2017 01:36 PM IST
विपिन बनियाल/अमर उजाला, देहरादून
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- फोटो : file photo
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बीजेपी की राजनीति में इस वक्त बहुत कुछ मथा जा रहा है। सीएम पद के लिए समीकरण हर पल बन-बिगड़ रहे हैं। दावेदारों के प्लान ए,बी,सी तैयार हो रहे हैं। करीब तीन साल पहले केसरिया चोला पहनने वाले सतपाल महाराज के खेमे की भी अपनी तैयारी है। पहले प्लान में पूरी ताकत के साथ सीएम पद हासिल करने की रणनीति है।
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ऐसा न होने की स्थिति में वैकल्पिक प्लान तैयार किया जा रहा है। इसमें महाराज की पत्नी और पूर्व मंत्री अमृता रावत को फ्रंट पर लाने की रणनीति शामिल है। महाराज के केंद्र में एडजस्टमेंट और अमृता रावत की कैबिनेट में एंट्री की बातें भी इस रणनीति के हिस्से माने जा रहे हैं। हालांकि बीजेपी हाईकमान इस पर क्या सोचता है, ये अलग बात है। मगर महाराज खेमा गंभीरता से इस संबंध में रणनीति बुन रहा है।

दरअसल, जिस तरह की महाराज के मोदी-शाह से संबंध हैं, उसमें उनके समर्थकों को सीएम पद की राह में कोई अड़चन नहीं दिखती। मगर संघ पृष्ठभूमि के नेता को सीएम बनाने के दबाव से स्थिति बदल सकती है। बीजेपी का आम कार्यकर्ता भी अपनी ये भावना प्रकट कर रहा है कि पार्टी के पुराने नेताओं में से ही किसी को सीएम होना चाहिए। इन स्थितियों के बीच, महाराज खेमा एहतियातन सारे विकल्पों को सामने रखकर तैयारी में जुटा है। 
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किन्हीं कारणों से महाराज सीएम नहीं बन पाते, तो उन्हें स्पीकर पद की पेशकश की जा सकती है। महाराज खेमा इस पर अपनी राय अभी जाहिर नहीं कर रहा है। वैसे, माना जा रहा है कि सीएम न बन पाने की स्थिति में महाराज केंद्र में एडजस्ट होना ज्यादा पसंद करेंगे। इस क्रम में राज्यसभा सदस्य बनने को वे तरजीह दे सकते हैं। मनोहर परिकर के गोवा का सीएम बन जाने के बाद यूपी में राज्यसभा की एक सीट खाली होने जा रही है। इसके अलावा, अमृता रावत को कैबिनेट में जगह दिलाने के लिए भी दबाव बनाया जा सकता है। अमृता रावत रामनगर से पहले चौबट्टाखाल की विधायक रह चुकी हैं। उनका मंत्री बनने का नंबर लगता है, तो चौबट्टाखाल सीट उनके लिए उपलब्ध रहेगी। 
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