गुरुवार को हरिद्वार में हरकी पैड़ी पर अमावस्या का स्नान भी हुआ। हालांकि कम संख्या में लोग पहुंचे, लेकिन स्नान की वजह से हरकी पैड़ी पर पसरा सन्नाटा टूट गया।
ज्येष्ठ अमावस्या पर श्रद्धालुओं ने पवित्र गंगा में डुबकी लगाई। स्थानीय लोगों के अलावा बाहरी राज्यों से पहुंचे श्रद्धालुओं की हरकी पैड़ी और अन्य घाटों पर भीड़भाड़ दिखी। यात्रियों ने कुशावर्त और नारायणी शिला जाकर पितरों के निमित्त श्राद्ध तर्पण भी किया। महिलाओं ने बड़ अमावस का व्रत रखकर दान पुण्य भी किया।
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कोरोनाकाल में श्रद्धालुओं की भीड़ सीमित रही। इसके बाद भी राजस्थान और पंजाब के यात्री गंगा स्नान के लिए पहुंचे। ज्येष्ठ का महीना गंगा मैया को समर्पण का महीना है। अमावस्या के दिन अस्थि प्रवाह के लिए भी अधिक श्रद्धालु पहुंचे। स्नानार्थियों ने हरकी पैड़ी और बाद में पुरोहितों की गद्दियों पर जाकर दान पुण्य भी किया। जिन महिलाओं ने बृहस्पतिवार को बड़ अमावस का पर्व मनाया उन्होंने व्रत रखकर वट वृक्षों की परिक्रमा की। जो महिलाएं वट वृक्षों तक नहीं गईं, उन्होंने वट की टहनी कलश में लगाकर घरों पर ही पूजा की।
तिथियों के दोनों दिन मौजूद रहने के कारण बड़ अमावस का त्योहार दो दिनों तक मनाया गया। महिलाओं ने अनेक प्रकार के खाद्य पदार्थों, फलों और मिष्ठान्न का संकल्प कर दान किया। महिलाओं ने शाम के समय व्रत खोला। सौभाग्य के प्रतीक इस मांगलिक पर्व पर घरों में पकवान बनाए गए। ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष में गंगा दशहरा और निर्जला एकादशी पर अच्छी भीड़ आने की संभावना है।
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स्नान की वजह से हरकी पैड़ी पर पसरा सन्नाटा टूट गया
सौभाग्य की प्रतीक वस्तुओं के साथ फल मिष्ठान्न आदि का दान दिया गया। गुरुवार को हरिद्वार में हरकी पैड़ी पर अमावस्या का स्नान भी हुआ। हालांकि कम संख्या में लोग पहुंचे, लेकिन स्नान की वजह से हरकी पैड़ी पर पसरा सन्नाटा टूट गया।
148 वर्ष बाद शनि जयंती पर पड़ रहा सूर्यग्रहण
साल का पहला सूर्यग्रहण 10 जून ज्येष्ठ मास की कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को है। इस दिन शनि जयंती भी है, इसलिए सूर्यग्रहण के साये पर शनिदेव का भी अद्भुत संयोग देखने को मिलेगा। हालांकि यह सूर्यग्रहण भारत के पूर्वोत्तर राज्य और जम्मू-कश्मीर में आंशिक रूप से दिखाई देगा। भारत में सूतक काल मान्य नहीं होगा। 148 वर्ष के बाद शनि जयंती के दिन सूर्यग्रहण पड़ रहा है।