सदाबहानी गगास नदी के संवर्धन के लिए अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से दो दिवसीय पदयात्रा सोमवार से शुरू हो गई। पदयात्रा सुबह नौ बजे नदी के उद्गम स्थल कुकुछिना स्थित गर्ग मुनि आश्रम से शुरू हो गई ।
जल पुरुष के नाम से विख्यात मैगसायसाय पुरस्कार प्राप्त राजेंद्र सिंह भी यात्रा में शिरकत करेंगे। इस मुहिम को स्थानीय नागरिकों, स्कूली बच्चों का भरपूर समर्थन मिल रहा है।
तमाम कारणों के चलते जलस्तर निरंतर गिरने से गगास नदी अंतिम सांसें गिन रही है। नदी से रानीखेत, द्वाराहाट क्षेत्र के लिए जहां छह बड़ी पेयजल योजनाएं संचालित हो रही हैं, वहीं क्षेत्र के किसान सिंचाई के लिए भी इसी नदी पर निर्भर हैं, लेकिन पिछले 12 साल से नदी का प्रवाह कम हो गया है। जंगल खत्म हो रहे हैं, चाल-खाल सूख रहे हैं।
बांज के जंगल के स्थान पर चीड़ के वन विकसित हो गए हैं और नदी के सहायक गाड़-गधेरे भी सूख चुके हैं। नदी बचाने के लिए अमर उजाला फाउंडेशन ने मुहिम चलाई है। इस मुहिम को क्षेत्रवासियों का समर्थन मिल रहा है। पिछले कई दिनों से चल रहे अभियान के तहत स्थानीय महिलाओं, स्कूली बच्चों ने नदी बचाने का संकल्प लिया है।
इसी के तहत अमर उजाला फाउंडेशन का नदी बचाओ पदयात्रा अभियान सोमवार 22 मई से शुरू हो रहा है। सुबह नौ बजे नदी के उद्गम स्थल पांडवखोली की तलहटी स्थित गर्ग मुनि आश्रम से पदयात्रा शुरू होगी। रात्रि विश्राम बूढ़ा सुरना गांव में होगा। मैगसायसाय पुरस्कार प्राप्त राजेंद्र सिंह भी पदयात्रा में शामिल होकर लोगों को जागरूक करेंगे।
द्वितीय चरण की पदयात्रा राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त पद्मश्री अनिल जोशी के नेतृत्व में शुरू होगी। जनहित, सामाजिक हितों के मुद्दों को लेकर संघर्ष कर रही विभूतियां भी इस यात्रा में शामिल होंगी। यात्रा का उद्देश्य नदी के उद्गम स्थल के समीपवर्ती ग्रामीणों को जागरूक करना, उद्गम स्थलों पर जल संचय वाले पौधों का रोपण, चाल, खाल (खाव) बनाना, ग्रामीणों का लगाव सीधे जंगल से कराना है।
जंगलों में हरियाली आएगी तो नमी बढ़ेगी, गाड़, गधेरे रिचार्ज होंगे। क्षेत्र की महिलाओं ने खासकर नदी को बचाने का संकल्प ले लिया है। पदयात्रा के लिए अमर उजाला फाउंडेशन की टीम यहां पहुंच गई है। टीम ने पद यात्रा की तैयारियों को लेकर क्षेत्र का विस्तृत जायजा लिया है।