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Dehradun: अमर उजाला के अभियान को मिला आधी आबादी का साथ, कहा जरूरी है पिंक शौचालय

Wed, 04 Oct 2023 06:14 PM IST
देहरादून ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून

सार

जनपद में महिलाओं की जनसंख्या पुरुषों के बराबर है। सुविधाओं के मामले में दोनों के बीच काफी अंतर है। शहर में मात्र 41 सार्वजनिक शौचालय हैं। इनमें 33 नगर के अंडर हैं जबकि सात शौचालय स्मार्ट सिटी ने बनाए हैं।
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पिंक टॉयलेट - फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर
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विस्तार
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बाजारों में पिंक शौचालय को लेकर अमर उजाला की मुहिम को आधी आबादी का साथ मिल रहा है। विभिन्न संगठनों से जुड़ी और आम महिलाओं ने अमर उजाला के माध्यम से सिस्टम से पूछा है कि जब आबादी में महिलाएं पुरुषों के बराबर हैं तो सुविधाओं में इतना अंतर क्यों। कहा कि बाजारों में शॉपिंग करने के लिए सबसे ज्यादा महिलाएं ही जाती है, लेकिन शौचालय न होने से उन्हें कई दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। कहा कि बाजारों में पिंक शौचालय की व्यवस्था होना आवश्यक भी है।

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विदित है कि जनपद में महिलाओं की जनसंख्या पुरुषों के बराबर है। सुविधाओं के मामले में दोनों के बीच काफी अंतर है। शहर में मात्र 41 सार्वजनिक शौचालय हैं। इनमें 33 नगर के अंडर हैं जबकि सात शौचालय स्मार्ट सिटी ने बनाए हैं। इनमें एक भी शौचालय पिंक शौचालय यानि महिलाओं के लिए अलग से नहीं है।

जो शौचालय हैं, उनकी अमर उजाला ने पड़ताल की तो उनकी हालत खस्ताहाल मिली। कहीं नल नहीं है, तो कहीं जल। गंदगी इतनी पसरी है कि उनके जाना तो दूर कोई झांकना भी पसंद नहीं करेगा। महिलाओं के लिए न सुरक्षा के इंतजाम है और अन्य सुविधा। यहां तक कि शौचालय में आने जाने के लिए एक ही गेट है। बाजारों में महिलाओं के लिए पिंक शौचालय हो इसके लिए अमर उजाल ने मुहिम शुरू की है। इसे आधी आबादी का पूरा साथ मिल रहा है।
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पिंक शौचालय को लेकर अमर उजाला की मुहिम शानदार है। बाजारों में खरीददारी करने के लिए सबसे ज्यादा महिलाएं जाती है, लेकिन शौचालय की व्यवस्था न होने के कारण काफी परेशानी होती है। सरकार को चाहिए जल्द इस दिखा में कार्य करें।
-स्वीटी जॉली

आबादी के लिहाज से महिलाएं पुरुषों के बराबर हैं, लेकिन सुविधाओं में इतना अंतर क्यों, समझ नहीं आता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक शौचालय को लेकर काफी गंभीर है। यहां भी सरकार को इसको लेकर गंभीरता दिखानी चाहिए।
-बिजया बिष्टII

आज महिलाएं हर क्षेत्र में पुरुषों की बराबरी कर रही है। हर क्षेत्र में महिलाएं अव्वल हैं। इसके बाद भी महिलाओं की उपेक्षा होती है। प्रदेश के राजधानी में महिलाओं के लिए एक अलग से शौचालय की व्यवस्था न होना गंभीर विषय है।
-अनु लांबाI


अमर उजाला ने महिलाओं की परेशानी को समझा, इसके लिए अमर उजाला को आभार। अब वह खुद भी इसके लिए संषर्ष करेंगी। अपने संगठन, महिला समूह आदि के माध्यम से इस मुहिम को आगे बढ़ाया जाएगा।
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- नैंसी धामीI

बाजारों में सबसे ज्यादा दिक्कत महिलाओं को होती है। इसलिए बाजारों में सार्वजनिक शौचालय के साथ ही महिलाओं के लिए भी अलग से पिंक टॉयलेट होना चाहिए। ताकि महिलाओं को कोई दिक्कत न हो।
-बीना रौतेलाI

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