सरकार ने गेहूं और धान की खरीद के लिए 2300 करोड़ की व्यवस्था की है। किसानों की आय दोगुनी करने के लिए राज्य समेकित सहकारी विकास योजना (सहकारी सामूहिक खेती) के लिए भी 100 करोड़ रुपये रखे हैं। दुधारू पशु खरीदने के लिए आसान ऋण, पशुचारा परिवहन योजना और सरकारी व सहकारी चीनी मिलों को लोन के लिए 399 करोड़ की गारंटी जैसे कदमों से किसानों को फायदा मिलेगा।
सोमदत्त शर्मा, प्रदेश अध्यक्ष, भारतीय किसान यूनियन (तोमर)
गन्ना किसानों के बकाया भुगतान के लिए सरकार ने 240 करोड़ रुपये की व्यवस्था की है। जबकि किसानों को पिछले करीब तीन साल से भुगतान नहीं किया है। इसके अलावा सरकार ने खेती में मशीनीकरण को बढ़ावा देने के लिए मौजूदा वित्तीय वर्ष में 500 फार्म मशीनरी बैंक और 800 कस्टम हायरिंग सेंटर स्थापित करने की घोषणा की है। लेकिन, इन सबका फायदा तब है, जब धरातल पर किसानों को लाभ मिले।
अरुण शर्मा, प्रदेश प्रवक्ता, भारतीय किसान यूनियन (तोमर)
प्रदेश सरकार ने बजट में करोड़ों रुपये की योजनाओं का सब्जबाग दिखाने का काम किया है। पूरे बजट में प्रदेश की भाजपा सरकार ये नहीं बता पाई कि इन करोड़ों की योजनाओं को पूरा करने के लिए बजट कहां-कहां से आएगा। किसान, व्यापारी, युवा, महिलाओं और बेरोजगारों के लिए सरकार ने बजट में कुछ भी नहीं किया है। सरकार पर कर्ज लगातार बढ़ता जा रहा है। उसे कम करने की योजना भी बजट में नहीं बताई गई है।
लालचंद शर्मा, अध्यक्ष, महानगर कांग्रेस
बजट में सरकार ने सभी वर्गों का पूरा ध्यान रखा है। एमएसएमई सेक्टर केंद्र सरकार की ज्यादातर बड़ी योजनाओं के जरिये उद्योगों के विकास की दिशा में आगे बढ़ेगा। मुद्रा लोन, स्किल डेवलपमेंट, मेक इन इंडिया, स्टार्ट अप में प्रदेश के विकास की पर्याप्त संभावनाएं हैं। पहाड़ों पर ढांचागत विकास न होने के कारण उद्योग पहाड़ जाने से बचते थे। ढांचागत सुविधाएं जुटने से अब उद्योग आसानी से पहाड़ चढ़ सकेंगे।
विनय गोयल, प्रदेश प्रवक्ता, भाजपा
सर्वेक्षण में आर्थिक सुस्ती की बात सही है। लेकिन, हमें यह भी नहीं भूलना होगा कि पूरा विश्व मंदी की चपेट में है। बजट में आर्थिक सुस्ती को दूर करने के लिए प्रदेश सरकार ने पीपीपी मोड की तरफ जाने के संकेत दिए हैं। उद्योगों के आने और किसानों का भला होने से ही आर्थिक सुस्ती दूर हो सकती है। मैदान और पहाड़ के विकास के बीच प्रदेश सरकार ने संतुलन बनाने की पूरी कोशिश की है।
रोमल जैन, चार्टर्ड अकाउंटेंट
कई पर्वतीय रूटों पर बसें चलाने से रोडवेज को घाटा होता है, जिसे दूर करने के लिए प्रदेश सरकार ने बजट में कई प्रावधान किए हैं। सरकार के इस कदम से नए और कम सवारी वाले रूटों पर बसें चलाना कुुछ आसान हो जाएगा। हम इतने वर्षों में जिला मुख्यालयों पर भी बस अड्डे और वर्कशॉप विकसित नहीं कर पाए हैं। सरकार ने ढांचागत सुविधाओं के विकास के लिए बजट इंतजाम किए हैं, जिसका निगम को फायदा मिलेगा।
अशोक चौधरी, महासचिव, उत्तराखंड रोडवेज कर्मचारी यूनियन
सरकार ने खेल सुविधाओं की ढांचागत सुविधाओं के लिए बजट देकर अच्छी पहल की है। सुविधाएं जुटने के बाद ही खेल खिलाड़ियों को फायदा मिलेगा। राष्ट्रीय खेलों के आयोजन के लिए हमें केंद्र सरकार से ज्यादा बजट की मांग करनी चाहिए। हालांकि खेल महाकुंभ के लिए केवल आठ करोड़ रुपये का बजट बहुत कम है। इससे आयोजन तो होता है लेकिन खिलाड़ियों को लंबे समय तक फायदा नहीं मिल पाता।
गुरफूल सिंह, चीफ कोच, एथलेटिक्स एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड
कृषि यंत्रों पर सब्सिडी बढ़ाने का फैसला किसानों के लिए बहुत अच्छा फैसला है। गन्ना किसानों की भुगतान संबंधी समस्याओं के समाधान के लिए इस वर्ष प्रदेश सरकार ने बजट में कुछ राहत दी है। बैंक गारंटी और चीनी मिलों को पैसे से किसानों का भुगतान समय पर होने की उम्मीद बंधी है। प्रदेश सरकार को बजट देने और योजना लागू करने के बाद उसकी मॉनिटरिंग का सिस्टम मजबूत करना चाहिए।
चमन कुमार, प्रदेश संगठन मंत्री, भारतीय किसान यूनियन (तोमर)
सरकार बार-बार किसानों की आय दोगुनी करने के लिए योजनाएं चलाने का दावा कर रही हैं। लेकिन अधिकारी-कर्मचारी इसमें बिल्कुल दिलचस्पी नहीं ले रहे हैं। बजट में भी अच्छे इंतजाम किए गए हैं। प्रदेश सरकार की मंशा खराब नहीं है। लेकिन अगर योजनाएं ठीक से लागू नहीं होंगी तो जनता को उनका कोई फायदा ही नहीं होगा। इसके लिए सरकार को लगातार योजनाओं की मॉनिटरिंग करने की जरूरत है। -
नरेंद्र सिंह चौहान, ब्लॉक अध्यक्ष, भारतीय किसान यूनियन (तोमर)