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Amar Ujala Samwad: जिनका पूरे देश में मान-सम्मान, 10 जून को उत्तराखंड संवाद में आपसे मिलने आएंगे

Sat, 07 Jun 2025 02:41 PM IST
रेनू सकलानी अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून

सार

अमर उजाला संवाद उत्तराखंड 10 जून को आयोजित होगा। आप भी इस सुनहरा अवसर का लाभ उठा सकते हैं।
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अमर उजाला संवाद उत्तराखंड - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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जिन हस्तियों का पूरे देश में मान-सम्मान है, वे अमर उजाला संवाद उत्तराखंड में आपसे रूबरू होने के लिए 10 जून को देहरादून पहुंच रहे हैं। अगर आप भी उन्हें देखना, सुनना चाहते हैं तो क्यूआर कोड स्कैन करके अपना पंजीकरण करा लें। ताकि आप भी आईएसबीटी के निकट स्थित होटल सेफर्ट सरोवर प्रीमियर में इस कार्यक्रम का हिस्सा बन सकें।

संवाद में शामिल होंगी ये हस्तियां

कैप्टन योगेंद्र सिंह यादव, परमवीर चक्र विजेता : महज 19 वर्ष की आयु में परमवीर चक्र प्राप्त करने वाली ग्रेनेडियर यादव सबसे कम उम्र के सैनिक हैं। कैप्टन योगेंद्र 18 ग्रेनेडियर्स के साथ कार्यरत कमांडो प्लाटून घातक का हिस्सा थे, जो चार जुलाई 1999 के शुरुआती घंटों में टाइगर हिल पर तीन सामरिक बंकरों पर कब्जा करने के लिए नामित की गई थी।

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बंकर एक ऊर्ध्वाधर, बर्फ से ढके 1000 फुट ऊंची चट्टान के शीर्ष पर थे। यादव स्वेच्छा से चट्टान पर चढ़ गए और भविष्य में आवश्यकता की संभावना के चलते रस्सियों को स्थापित किया। आधे रास्ते में एक दुश्मन बंकर ने मशीन गन और रॉकेट फायर किया, जिसमें प्लाटून कमांडर और दो अन्य शहीद हो गए। गले और कंधे में तीन गोलियां लगने के बावजूद यादव शेष 60 फीट चढ़ गए और शीर्ष पर पहुंचे। गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद वह पहले बंकर में घुस गए।

एक ग्रेनेड से चार पाकिस्तानी सैनिकों की हत्या कर दी और दुश्मन को स्तब्ध कर दिया। जिससे बाकी प्लाटून को चट्टान पर चढ़ने का मौका मिला। उसके बाद यादव ने अपने दो साथी सैनिकों के साथ दूसरे बंकर पर हमला किया और हाथ से हाथ की लड़ाई में चार पाकिस्तानी सैनिकों की हत्या की। इस तरह प्लाटून ने टाइगर हिल पर कब्जा कर लिया।
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गौर गोपाल दास, प्रेरक वक्ता : सोशल मीडिया में 51 लाख से अधिक अनुयायी वाले गौर गोपाल दास जाने-माने प्रेरक वक्ता व लाइफ कोच हैं। इंजीनियरिंग की नौकरी छोड़ने के बाद वे इंटरनेशनल सोसाइटी फॉर कृष्णा कॉन्शसनेस (इस्कॉन) से जुड़ गए। महाराष्ट्र में जन्मे दास ने कुसरो वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, पुणे से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा किया। 1992 में स्नातक करने के बाद पुणे के कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग से 1995 में इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में डिग्री की और एक नामी कंपनी में नौकरी शुरू कर दी। 1996 में उन्होंने नौकरी छोड़ दी और इस्कॉन में शामिल हो गए। जीवन के अद्भुत रहस्य, जीवन में संतुलन और उद्देश्य उनकी चर्चित पुस्तक रही। भारतीय जीवन शैली को लेकर उनकी गहन पकड़ है, जिस पर लोग उन्हें सुनने के लिए दूर-दराज से आते हैं।

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डॉ. अभय बंग, निदेशक, सर्च : डॉ. अभय बंग सामुदायिक स्वास्थ्य शोधकर्ता हैं, जो महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले में काम कर रहे हैं। उन्होंने शिशु मृत्यु दर को कम करने के उद्देश्य से पहल और कार्यक्रम विकसित किए हैं। उनके प्रयासों को विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) और संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (यूनिसेफ) ने भी सराहा है। अभय ने सोसाइटी फॉर एजुकेशन, एक्शन, एंड रिसर्च इन कम्युनिटी हेल्थ (सर्च) की स्थापना की, जो ग्रामीण स्वास्थ्य सेवा और अनुसंधान में काम करती है। महाराष्ट्र भूषण पुरस्कार से सम्मानित डॉ. बंग को लखनऊ में संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान से मानद डॉक्टरेट की उपाधि से सम्मानित किया जा चुका है। उन्होंने शिशु की मौत के 18 संभावित कारणों की पहचान की, जिनमें गरीबी, डायरिया, संक्रमण, निमोनिया या अस्पताल की कमी शामिल है। उन्होंने विश्व स्तरीय शोध भी किया।

 

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