घर से करीब 20 किमी दूर स्कूल। रोजाना सुबह स्कूटी से करीब एक घंटे का सफर तय कर स्कूल पहुंचना और लौटना। धूप हो या बारिश। सर्दी हो या गर्मी। सुबह घर से निकलना और पढ़ाई करने के बाद देर से लौटना। लेकिन, मन में कुछ करने की ललक थी, इसलिए यह चुनौती ज्यादा परेशान नहीं कर पाई। यह कहानी है उत्तराखंड बोर्ड की 12वीं की परीक्षा में प्रदेश में पहला स्थान हासिल करने वाली शताक्षी तिवारी की। शताक्षी के पिता अनूप तिवारी इंजीनियर और मां सुनीता तिवारी सीएचसी छाम में कार्यरत हैं।
रोजाना करीब 20 किमी का सफर तय कर शताक्षी कंडीसौड़ स्थित अपने घर से सरस्वती विद्या मंदिर चिन्यालीसौड़ पहुंचती और शाम को घर लौटती थी। करीब 20 किमी दूर स्कूल आने-जाने के लिए माता-पिता ने शताक्षी को स्कूटी खरीदकर दी। आने-जाने में इतना ज्यादा समय लग जाता कि शताक्षी के पास ट्यूशन जाने का भी समय नहीं बचता था। ऐसे में वह घर पर रोजाना करीब छह घंटे तक पढ़ाई करती थी। शताक्षी ने अपनी सफलता का श्रेय शिक्षकों को भी दिया। उन्होंने कहा कि शिक्षकों ने समर्पित होकर मेहनत की, जिससे विद्यालय के कई छात्र सफलता हासिल करने में कामयाब हुए।
अच्छी शिक्षा और सफलता हासिल करने के लिए एक तरफ जहां निजी स्कूलों में प्रवेश की मारामारी लगी है। वहीं, अनंता सकलानी ने इसके ठीक उलट निजी विद्यालय छोड़कर विद्या मंदिर में प्रवेश लिया। उत्तराखंड बोर्ड की हाईस्कूल प्रवेश परीक्षा में प्रदेशभर में पहला स्थान हासिल कर अनंता ने निजी स्कूलों को सफलता का पर्याय मानने वालों के मुंह पर ताला जड़ दिया।
अनंता के पिता प्रशांत सकलानी पूर्व माध्यमिक विद्यालय सिल्ला रायपुर में सहायक अध्यापक और मां सुनीता सकलानी प्राथमिक विद्यालय भोपालपानी में शिक्षिका हैं। अनंता की तीसरी तक की पढ़ाई चमोली जिले में और उसके बाद सातवीं तक पढ़ाई दून इंटरनेशनल स्कूल में हुई। आठवीं में अनंता ने दून इंटरनेशनल छोड़कर सरस्वती विद्या मंदिर नथुआवाला में प्रवेश लिया। तब लोगों ने अनंता के माता-पिता से कहा कि बाकि सब निजी स्कूलों में प्रवेश के लिए चक्कर काट रहे हैं और आप उल्टी गंगा बहा रहे हो। लेकिन दो साल में अनंता ने अपनी मेहनत और लगन से उन सबको गलत साबित कर दिया।
अनंता ने बताया कि वह विज्ञान से बारहवीं की पढ़ाई करने के बाद मानविकी लेकर सिविल सर्विसेज की तैयारी करना चाहती हैं।
शिक्षकों ने बढ़ाया हौसला
निजी विद्यालय छोड़कर जब अनंता ने विद्या मंदिर में प्रवेश लिया तो रिश्तेदारों और परिचितों ने सवाल उठाए। तब शिक्षकों ने उनका हौसला बढ़ाया। उन्होंने बताया कि फिजिक्स टीचर मुकेश ममगाई और मैथ्स टीचर रामेंद्र ने कहा कि अपनी मेहनत से वह सबको जवाब दे सकती है।