साइबर ठगी को रोकने के लिए अब थानों में साइबर सेफ पोर्टल बनाया जाएगा। पुलिस मुख्यालय के आदेश के बाद ऊधमसिंह नगर जिला पुलिस ने इसकी तैयारियां शुरू कर दीं हैं। फ्रॉड नंबरों की शिकायत मिलने पर पुलिसकर्मी हाथोंहाथ नंबर को पोर्टल में अपलोड करेंगे। एक ही नंबर से बार-बार हो रही ठगी को रोकना और साइबर ठगों को चिन्हित करने के लिए यह पोर्टल बनाया जा रहा है।
साइबर ठगी को रोकने के लिए प्रत्येक जिलों में साइबर सेल गठित कि ए गए हैं। साइबर वैज्ञानिकों की तत्परता से रोजाना सैकड़ों लोग ठगी के शिकार होने से बच जाते हैं। तमाम ऐसे लोग भी हैं जिनके खातों से रुपये गायब होने के बाद वापस मिल जाते हैं।
साइबर सेल में पहुंचने पर देरी और तत्काल इसकी सूचना देने के लिए थानों में साइबर सेफ पोर्टल बनाया जा रहा है। इस पोर्टल में ठगी करने वाले नंबर को अपलोड किया जाएगा। इन नंबरों को विशेषज्ञ ट्रेस करेंगे और इससे अपराधियों का पता लग सकेगा। नंबरों को टीम ब्लॉक भी करेगी ताकि कोई अन्य व्यक्ति उस नंबर से ठगी का शिकार न बन सके।
जिले में 1100 लोगों से ठगी
ऊधमसिंह नगर जिले के एक जनवरी से अब तक 1100 लोगों से साइबर ठगी हो चुकी है। साइबर सेल प्रभारी हिमांशु पंत और विशेषज्ञ चंदन बिष्ट ने बताया कि गलत साइटों पर जाकर खरीदारी करने और लॉटरी के लालच में आकर लोग ठगे गए हैं। उन्होंने बताया कि ठगी के बाद 17 लाख रुपये रिकवर कराए गए हैं, जबकि 25 लाख से अधिक की ठगी हो चुकी है।
साइबर ठगी से ऐसे बचें
-गूगल पर जाकर किसी भी सामान की खरीदारी न करें
-पेटीएम की केवाईसी के लिए ऑनलाइन संपर्क न कर नजदीकी सेंटर में जाएं
-फेसबुक, इंस्ट्राग्राम, ट्विटर पर हमेशा मजबूत पासवर्ड लगाएं
-कॉल आने पर किसी को बैंक, आधार नंबर न बताएं
-कॉल आने पर किसी भी एप्लीकेशन को डाउनलोड न करें
साइबर ठगी को रोकने के लिए मजबूती से काम किया जा रहा है। पूरे राज्य के थानों में साइबर सेफ पोर्टल बनाए जाएंगे। साइबर अपराध को रोकने के लिए यह प्रयोग मील का पत्थर साबित होगा।
-अशोक कुमार, डीजी कानून एवं व्यवस्था। फोटो-16 आरडीपी 21पी- अशोक कुमार।