मैं जानती हूं, अखबारों में भी इंसान ही काम करते हैं, ..और वह इंसान ही क्या, जो गलती न करे। मैंने इस भाव से फोन नहीं किया था कि अखबार में गलत क्यों छपा, बल्कि यह मेरी अखबार के प्रति प्रेम और अभिरूचि थी, जिसे मैंने अपना फर्ज समझकर निभाया। अमर उजाला ने हमेशा से उत्तराखंड के तीज-त्योहारों और यहां की संस्कृति को आगे बढ़ाने में मदद की है।
मैंने अपना जीवन इन्हीं कामों को समर्पित किया है। इसलिए इस अखबार से हमेशा से एक रिश्ता सा बना रहा। जब पद्मश्री के लिए मेरे नाम की घोषणा हुई तो इत्तेफाक से यह खबर भी अमर उजाला में सबसे पहले छपी थी। मुझे बचपन से ही पढ़ने का बहुत शौक था, यही वजह थी कि मैं समय निकालकर पूरा अखबार पढ़ लेती थे।
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संपादकीय पृष्ठ पढ़ना शुरू से मेरी अभिरूचि रही। शनिवार रविवार को आने वाले विशेषांक और कहानी किस्सों का कोना भी मुझे बहुत पसंद रहा है। मैं अमर उजाला के विभिन्न कार्यक्रमों का हिस्सा बनी हूं। महिलाओं को समर्पित अमर उजाला की मुहिम अपराजिता ने मुझे बहुत आकर्षित किया।
-पद्मश्री डॉ माधुरी बड़थ्वाल, संगीत निर्देशिका, लेखिका