तीन साल पहले पिता संजीव कुमार की काशीपुर में खेती के दौरान हुई मौत के बाद दिहाड़ी मजदूरी करके मां रेखा अपने बच्चों को किसी तरह पाल रही थी, लेकिन अचानक रेखा कोरोना संक्रमण की चपेट में आ गई और 18 मई को रुद्रपुर के एक निजी अस्पताल में उसकी मौत हो गई। इसके बाद उसके दोनों बेटे अनाथ हो गए। बड़ा बेटा 14 वर्ष, जबकि छोटा बेटा 12 साल का है। पहले पिता और अब मां को खोने के बाद बच्चे बेहद दुखी हैं।
रुद्रपुर : कोरोना ने पिता को छीना, अनाथ बेटियों को संभाल रहे गांव वाले
पिछले साल कोरोना संक्रमण के चलते सितारगंज के पंडारी में रहने वाले नासिर हुसैन की मौत के बाद उनकी दोनों बेटियों को गांव वाले संभाल रहे हैं। पड़ोसी इरफान अहमद ने बताया कि मां का पहले ही देहांत होने की वजह से पिता नासिर मजदूरी करके अपनी दोनों बेटियों को पाल रहे थे। लेकिन कोरोना संक्रमण से मौत के बाद दोनों बेटियों की सुध लेने वाला कोई नहीं है।
खटीमा : कोरोना ने तनुजा एवं रोशनी से छीना पिता का साया
ग्राम तिगरी निवासी तनुजा एवं रोशनी के पिता को कोविड महामारी ने छीन लिया। पिता विक्रम सिंह फिकवाल की करीब आठ महीने पहले हुई मौत के बाद परिवार के सामने रोजी-रोटी का संकट पैदा हो गया। विक्रम की मौत के बाद उसकी पत्नी बबीता फिकवाल दो बेटियों के भविष्य को लेकर चिंतित हैं। विक्रम की मौत के बाद दो पुत्रियां में बड़ी तनुजा(8) और छोटी पुत्री रोशनी(5) की आगे की पढ़ाई और पालन-पोषण कैसे होगा, इसे लेकर बबीता परेशान हैं।
कोरोना से अनाथ हुए बच्चों की मदद के लिए बढ़े हाथ
बागेश्वर जिले के हरखोला (झिरौली) निवासी एडवोकेट ललित मोहन जोशी कोरोना में अनाथ हो चुके 100 बच्चों को निशुल्क उच्च शिक्षा प्रदान करेंगे। प्रदेश के किसी भी जिले से योग्यता रखने वाले छात्र-छात्राएं उनके देहरादून स्थिति शिक्षण संस्थान सीआईएसएस और यूआईएचएमटी में डिप्लोमा या डिग्री कोर्स कर सकेंगे।
सीआईएसएस और यूआईएचएमटी ग्रुप के चेयरमैन ललित जोशी ने कहा कि कोरोना के चलते कुमाऊं और गढ़वाल के पहाड़ी क्षेत्रों में कई बच्चे अनाथ हो गए हैं। कमाई का जरिया नहीं होने से योग्य बच्चों की शिक्षा भी प्रभावित होने की आशंका है। ऐसे बच्चों को संस्थान में निशुल्क प्रवेश दिया जाएगा और उनकी शिक्षा का पूरा खर्च भी कॉलेज उठाएगा।
ऋषिकेश : अनाथ बच्चों की मदद के लिए बढ़ाया हाथ
कोरोना वैश्विक महामारी में जिन बच्चों के सिर से उनके माता-पिता का साया छिन गया है, उनकी मदद के लिए चंद्रेश्वरनगर स्थित ज्ञान करतार पब्लिक स्कूल ट्रस्ट के प्रबंधक गुरविंदर सलूजा ने मदद को हाथ बढ़ाया है। गुरविंदर सलूजा ने बताया कि कोविड-19 के दौर में अनाथ हुए बच्चों की शिक्षा दीक्षा की संपूर्ण जिम्मेदारी स्कूल ट्रस्ट ने ली है। इसमें बच्चों की स्कूल फीस से लेकर उनकी ड्रेस और कॉपी, किताबों का खर्चा ट्रस्ट उठाएगा। साथ ही होनहार बच्चों के लिए स्कॉलरशिप की योजना है। कहा कि इसी शैक्षणिक सत्र के प्रारंभ में ऐसे बच्चों को स्कूल में प्रवेश दिया जाएगा। स्कूल में प्रवेश प्रक्रिया पांच जुलाई से प्रारंभ होगी। इसके लिए बच्चे के माता या पिता की मृत्यु का कोविड-19 प्रमाणपत्र अनिवार्य होगा। अभी यह व्यवस्था नर्सरी से पांचवीं कक्षा तक के बच्चों के लिए है। बच्चों की आगे की पढ़ाई के लिए भी वह पूरी तरह से तत्पर हैं।