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अमर उजाला अपनत्व अभियान : घोषणा को जमीं पर उतारें, बच्चों का जीवन संवारें 

Mon, 31 May 2021 02:33 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून

सार

उत्तराखंड में कोरोना महामारी ने जिन बच्चों से उनके माता-पिता को छीन लिया है। अमर उजाला ने उनकी पहचान के लिए यह अभियान शुरू किया है। ऐसे बच्चों के बारे में जानकारी हो तो हमें 7617566171 पर व्हाट्सअप के जरिए या ddn-cityreporter@amarujala.com पर मेल करें।
 
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अमर उजाला ने शुरू किया अभियान - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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उत्तराखंड सरकार ने कोरोना में माता-पिता गंवाने वाले बच्चों की मदद के लिए वात्सल्य योजना की घोषणा तो कर दी, लेकिन इन बच्चों को अब तक मदद नहीं मिली है। निजी तौर पर अथवा कुछ संस्थाएं ही इन बच्चों की मदद के लिए आगे आई हैं। लालफीताशाही का आलम यह है कि इन बच्चों की मदद के लिए घोषित वात्सल्य योजना की रूपरेखा और शर्तें तक तय नहीं की जा सकी हैं।  

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उत्तराखंड : कोविड से अनाथ हुए बच्चों की मदद के लिए विभाग को शासनादेश का है इंतजार

उत्तराखंड में कोरोना महामारी ने जिन बच्चों से उनके माता-पिता को छीन लिया है। अमर उजाला ने उनकी पहचान के लिए यह अभियान शुरू किया है। ऐसे बच्चों के बारे में जानकारी हो तो हमें 7617566171 पर व्हाट्सअप के जरिए या ddn-cityreporter@amarujala.com पर मेल करें।
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अमर उजाला अपनत्व अभियान : कोरोना से बच्चे हुए बेसहारा, अब सरकार का ही आसरा

ऋषिकेश : आराध्या और अंशुल के सिर से उठा पिता का साया 
श्यामपुर स्थित गुमानीवाला गली नंबर दो, अमितग्राम निवासी सुभाष मैठाणी (40) का निधन हो गया है। कोरोना संक्रमित होने के कारण बीते तीन मई को उनका स्वास्थ्य बिगड़ गया। परिजनों ने उन्हें एम्स में भर्ती किया। एम्स में उनका उपचार शुरू हुआ, लेकिन 18 मई को वह जिंदगी की जंग हार गए। वह अपने पीछे अपनी पत्नी कामना मैठाणी (35), बेटा अंशुल (15) और बेटी आराध्या (9) को रोता बिलखता छोड़ गए हैं। सुभाष पुरोहित का काम करते थे। वही अपने परिवार के इकलौते कमाने वाले थे। 

हल्द्वानी : पिता चल बसे, कैसे होगी बेटियों की परवरिश 
पीपलपोखरा नंबर एक, गांधी आश्रम निवासी विनीता पंत और उनकी दो बेटियों के सामने भरण-पोषण का संकट आ गया है। परिवार के एकमात्र कमाने वाले उनके पति विजय पंत का चार मई को कोरोना से निधन हो गया। विनीता ने बताया कि पति छोटी सी दुकान चलाते थे। वह कम पढ़ी लिखीं हैं, इस कारण अब दुकान भी नहीं चला सकतीं। ससुर की काफी समय पहले मृत्यु हो चुकी है, सास वृद्धा हैं। चाचा, ताऊ भी नहीं हैं। अब कोई देखने वाला नहीं है। बड़ी बेटी सात साल और छोटी पांच साल की है। छोटी को दिमागी परेशानी है। अब बच्चों की परवरिश के लिए दिक्कत खड़ी हो गई है। 

हल्द्वानी : इस गंगा को बच्चों के भविष्य के लिए करने हैं भगीरथ प्रयास
बच्चीनगर सैनिक कॉलोनी निवासी गंगा देवी भी पति की मौत के बाद टूट चुकीं हैं। दो मई को उनके पति लाल सिंह बोरा का असामयिक निधन हो गया। वह सिंचाई विभाग में ठेकेदार के अधीन काम करते थे। उनकी तीन बेटियां हैं। बड़ी बेटी ईशा 12वीं में पढ़ती हैं, काजल नौवीं और चांदनी कक्षा छह में पढ़ती हैं। बेटा गौरव काफी छोटा है। ईशा ने बताया कि पिता के निधन के बाद परिवार को काफी कष्ट भरे दिन बिताने पड़ रहे हैं। न आय का जरिया और न पैसे की बचत है। मेरी और बहनों की पढ़ाई में भी दिक्कत खड़ी हो गई है।

कोटद्वार: कोविड ने दस साल के जतिन के सिर से छीन लिया पिता का साया 
लैंसडौन तहसील की पट्टी कौड़िया, पोस्ट चुंडई के पीड़ा गांव निवासी 10 साल के जतिन रावत के सिर से कोविड महामारी ने पिता का साया छीन लिया। पिता सुनील सिंह रावत हरिद्वार सिडकुल में एक फैक्ट्री में प्राइवेट नौकरी करते थे। वह हरिद्वार में ही किराए का कमरा लेकर अपनी पत्नी माया रावत और बेटे जतिन के साथ रह रहे थे। इस बीच नौकरी में जतिन के पिता सुनील कोविड-19 की चपेट में आ गए। तबियत बिगड़ने पर उन्हें जौलीग्रांट अस्पताल में भर्ती कराया, जहां 27 अप्रैल को उनका निधन हो गया। पिता की मौत के बाद अब जतिन की पढ़ाई और जिम्मेदारी मां पर आ गई। परिजनों ने राज्य सरकार से परिवार की आर्थिक मदद और जतिन की मां को सरकारी नौकरी दिलाने की गुहार लगाई है।

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रुद्रपुर : मां की कोरोना से मौत के बाद बच्चे हुए अनाथ

तीन साल पहले पिता संजीव कुमार की काशीपुर में खेती के दौरान हुई मौत के बाद दिहाड़ी मजदूरी करके मां रेखा अपने बच्चों को किसी तरह पाल रही थी, लेकिन अचानक रेखा कोरोना संक्रमण की चपेट में आ गई और 18 मई को रुद्रपुर के एक निजी अस्पताल में उसकी मौत हो गई। इसके बाद उसके दोनों बेटे अनाथ हो गए। बड़ा बेटा 14 वर्ष, जबकि छोटा बेटा 12 साल का है। पहले पिता और अब मां को खोने के बाद बच्चे बेहद दुखी हैं।

रुद्रपुर : कोरोना ने पिता को छीना, अनाथ बेटियों को संभाल रहे गांव वाले
पिछले साल कोरोना संक्रमण के चलते सितारगंज के पंडारी में रहने वाले नासिर हुसैन की मौत के बाद उनकी दोनों बेटियों को गांव वाले संभाल रहे हैं। पड़ोसी इरफान अहमद ने बताया कि मां का पहले ही देहांत होने की वजह से पिता नासिर मजदूरी करके अपनी दोनों बेटियों को पाल रहे थे। लेकिन कोरोना संक्रमण से मौत के बाद दोनों बेटियों की सुध लेने वाला कोई नहीं है।

खटीमा : कोरोना ने तनुजा एवं रोशनी से छीना पिता का साया
ग्राम तिगरी निवासी तनुजा एवं रोशनी के पिता को कोविड महामारी ने छीन लिया। पिता विक्रम सिंह फिकवाल की करीब आठ महीने पहले हुई मौत के बाद परिवार के सामने रोजी-रोटी का संकट पैदा हो गया। विक्रम की मौत के बाद उसकी पत्नी बबीता फिकवाल दो बेटियों के भविष्य को लेकर चिंतित हैं। विक्रम की मौत के बाद दो पुत्रियां में बड़ी तनुजा(8) और छोटी पुत्री रोशनी(5) की आगे की पढ़ाई और पालन-पोषण कैसे होगा, इसे लेकर बबीता परेशान हैं।

कोरोना से अनाथ हुए बच्चों की मदद के लिए बढ़े हाथ 
बागेश्वर जिले के हरखोला (झिरौली) निवासी एडवोकेट ललित मोहन जोशी कोरोना में अनाथ हो चुके 100 बच्चों को निशुल्क उच्च शिक्षा प्रदान करेंगे। प्रदेश के किसी भी जिले से योग्यता रखने वाले छात्र-छात्राएं उनके देहरादून स्थिति शिक्षण संस्थान सीआईएसएस और यूआईएचएमटी में डिप्लोमा या डिग्री कोर्स कर सकेंगे।

सीआईएसएस और यूआईएचएमटी ग्रुप के चेयरमैन ललित जोशी ने कहा कि कोरोना के चलते कुमाऊं और गढ़वाल के पहाड़ी क्षेत्रों में कई बच्चे अनाथ हो गए हैं। कमाई का जरिया नहीं होने से योग्य बच्चों की शिक्षा भी प्रभावित होने की आशंका है। ऐसे बच्चों को संस्थान में निशुल्क प्रवेश दिया जाएगा और उनकी शिक्षा का पूरा खर्च भी कॉलेज उठाएगा। 

ऋषिकेश : अनाथ बच्चों की मदद के लिए बढ़ाया हाथ 
कोरोना वैश्विक महामारी में जिन बच्चों के सिर से उनके माता-पिता का साया छिन गया है, उनकी मदद के लिए चंद्रेश्वरनगर स्थित ज्ञान करतार पब्लिक स्कूल ट्रस्ट के प्रबंधक गुरविंदर सलूजा ने मदद को हाथ बढ़ाया है। गुरविंदर सलूजा ने बताया कि कोविड-19 के दौर में अनाथ हुए बच्चों की शिक्षा दीक्षा की संपूर्ण जिम्मेदारी स्कूल ट्रस्ट ने ली है। इसमें बच्चों की स्कूल फीस से लेकर उनकी ड्रेस और कॉपी, किताबों का खर्चा ट्रस्ट उठाएगा। साथ ही होनहार बच्चों के लिए स्कॉलरशिप की योजना है। कहा कि इसी शैक्षणिक सत्र के प्रारंभ में ऐसे बच्चों को स्कूल में प्रवेश दिया जाएगा। स्कूल में प्रवेश प्रक्रिया पांच जुलाई से प्रारंभ होगी। इसके लिए बच्चे के माता या पिता की मृत्यु का कोविड-19 प्रमाणपत्र अनिवार्य होगा। अभी यह व्यवस्था नर्सरी से पांचवीं कक्षा तक के बच्चों के लिए है। बच्चों की आगे की पढ़ाई के लिए भी वह पूरी तरह से तत्पर हैं। 
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