ऋषिकेश नगर पंचायत स्वर्गाश्रम जौंक अंतर्गत वार्ड नंबर तीन में कोरोना संक्रमण से दो बच्चों के सिर से पिता का साया उठ गया है। खेलने कूदने की उम्र में बच्चे जिंदा रहने के लिए कठिन संघर्ष करने को विवश हैं। वार्ड नंबर तीन निवासी शिवेश रावत (37) स्वर्गाश्रम क्षेत्र में मार्केटिंग का काम करता था। 25 अप्रैल को उनका स्वास्थ्य ठीक न होने के कारण उन्होंने राजकीय एलोपैथिक चिकित्सालय लक्ष्मणझूला में अपना रैपिड एंटीजन टेस्ट कराया था। जिसमें उनके रिपोर्ट निगेटिव आई थी।
26 अप्रैल को उनका स्वास्थ्य अचानक बिगड़ गया। हालत गंभीर होने पर उन्हें ऋषिकेश एम्स में भर्ती किया गया। जहां उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया। इस दौरान उनकी कोविड-19 जांच की गई। जांच के दौरान उनकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई। एम्स में उनका उपचार चलने लगा। लेकिन अफसोस 28 अप्रैल को वह जिंदगी की जंग हार गए। उनकी पत्नी प्रमिला रावत गहरे सदमे में है, उनका रो-रोकर बुरा हाल है। उनकी ढाई साल की बड़ी बेटी आध्या और दस माह की छोटी बेटी आराध्या का अब पालन पोषण आखिर कैसे होगा।
मुखिया की मौत से बेसहारा हुआ दिव्यांग परिवार
नई टिहरी के थौलधार ब्लॉक में भंगर गांव निवासी दिव्यांग चंद्रमोहन पंत (54) का निधन होने से उसके परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। चंद्रमोहन पत्नी और दो बच्चे सभी दिव्यांग का भरण-पोषण अभी तक अपनी दिव्यांग पेंशन से कर रहा था। लेकिन घर के मुखिया की मौत के बाद अब उनका कोई सहारा नहीं है। स्थिति यह है कि उनके पास खेतीबाड़ी करने के लिए कोई जमीन भी नहीं है।
क्षेत्र के जिला पंचायत सदस्य जयवीर सिंह रावत ने बताया कि चंद्रमोहन को चार-पांच दिन से बुखार की शिकायत थी। मंगलवार सांय को उसे सांस लेने में दिक्कत हुई और उसके कुछ देर बाद ही रात को उसने दम तोड़ दिया। उन्होंने बताया कि उनकी पत्नी विनीता (50), बेटा गणेश (28) और शुभम (26) सभी दिव्यांग (अंधे) हैं, जिससे वह कोई मजदूरी व अन्य कार्य करने में भी सक्षम नहीं है। रावत ने डीएम को भेजे ज्ञापन में इस बेसहारा दिव्यांग परिवार को आर्थिक मदद की मांग की है।
अपनों को खोने वाले आठ बच्चों को दी मदद
देहरादून जिले में चाइल्ड लाइन की सहयोगी संस्थान पर्वतीय बाल मंच ने कोरोना के दौरान अपनों को खोने वाले आठ बच्चों को मदद उपलब्ध कराई। अमर उजाला के अपनत्व अभियान से जुड़ते हुए मंच ने बच्चों तक मदद पहुंचाई। एमसीएफ चाइल्ड लाइन की केंद्र समन्वयक दीपिका पंवार ने बताया कि कोई भी व्यक्ति 1098 पर संपर्क कर बच्चों के संबंध में जानकारी दे सकता है। यह राष्ट्रीय हेल्पलाइन है, जो बच्चों की मदद करती है। उन्होंने बताया कि दून में अपनों को खोने वाले आठ परिवारों के बच्चों को कच्चा राशन व अन्य सामान वितरित किया गया। उन्हें और उनके अभिभावकों व संरक्षकों को वात्सल्य योजना के संबंध में भी विस्तार से जानकारी दी गई।