कोरोना ने निजमूला घाटी (गोपेश्वर) के थोली ब्यारा गांव के तीन बच्चों के सिर से पिता का साया छीन लिया। 15 दिन पूर्व देहरादून में इलाज के दौरान गांव के 40 वर्षीय दलीप सिंह का निधन हो गया, जिसके बाद पत्नी और तीन बच्चे असहाय छूट गए हैं।
स्व. दलीप अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा देने के लिए देहरादून में किराए के कमरे पर रह रहे थे। परिवार के भरण-पोषण के लिए दलीप ने कमरे के समीप ही एक सब्जी की दुकान खोली, इसी दुकान से वे बच्चों की पढ़ाई और घर के खर्चे की व्यवस्था करते थे।
अब पति की मौत के बाद बेसहारा हुई 35 वर्षीय रेखा बेसहारा हो गई है, बेटा योगेंद्र (16), रितिक (13) व बेटी ऋचा (15) भी असहाय छूट गए हैं। अब इनके सम्मुख आजीविका का संकट भी खड़ा हो गया है। गांव के ग्राम प्रधान मोहन सिंह नेगी ने सरकार से परिवार की आर्थिक सहायता और रेखा को सरकारी नौकरी दिए जाने की मांग की है। उन्होंने बताया कि तीनों बच्चे पढ़ाई में अव्वल हैं, अब पिता के निधन के बाद बच्चों की पढ़ाई-लिखाई भी चरमरा गई है।
100 बच्चों को निशुल्क शिक्षा देगा सीआईएमएस व यूआईएचएमटी ग्रुप
कोरोना महामारी में माता-पिता को खोने वाले 100 बच्चों को सीआईएमएस और यूआईएचएमटी ग्रुप ऑफ कॉलेज मुफ्त शिक्षा देगा। ग्रुप के चेयरमैन एडवोकेट ललित मोहन जोशी ने बताया कि अनाथ बच्चे कॉलेज के किसी भी कोर्स में निशुल्क प्रवेश ले सकते हैं। बच्चों की पढ़ाई का पूरा खर्च वही उठाएंगे। उन्होंने कहा कि बच्चों को उच्च शिक्षा के लिए किसी तरह की दिक्कत न हो, इसके प्रयास किए जाएंगे।