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इस सीट पर बसपा देगी कांग्रेस-भाजपा को चुनौती

Fri, 14 Mar 2014 12:43 PM IST
सुधाकर भट्ट/ अमर उजाला, देहरादून
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अल्मोड़ा संसदीय सीट अब एक ऐसी तनी हुई रस्सी पर चलने जैसी है जिसमें हल्की सी चूक भी संतुलन को खोने वाली साबित हो सकती है।
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खेल बिगाड़ने वाली स्थिति में बसपा
इस सीट पर बसपा भले ही जीत के प्रति आश्वस्त न करती हो पर खेल बिगाड़ने वाली स्थिति में बसपा अब दिखने लगी है।

पिछले चुनावों में राजनीतिक दलों का प्रदर्शन बता रहा है कि कांग्रेस करीब तीन विधानसभा क्षेत्रों में मजबूत पकड़ के कारण किसी भी चुनौती का सामना कर सकती है।

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भाजपा का प्रदर्शन सामान्य रूप से बेहतर है पर कांग्रेस की मजबूत विधानसभाओं में उसे घुसने का मौका नहीं मिल पाया है।

पिछले तीन चुनावों के नतीजों पर गौर करें तो कांग्रेस और भाजपा को इस पर बसपा से चिंतित होने के कई कारण दिखाई देते हैं।

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बसपा ने हालांकि 2012 के विधानसभा चुनाव में कुल दस प्रतिशत वोट हासिल किए थे पर डीडीहाट जैसी सीट पर उसने 22 प्रतिशत वोट हासिल कर कांग्रेस और भाजपा के समीकरण तो बिगाड़ ही दिया था।
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25 प्रतिशत से अधिक वोट हासिल किए
इसी तरह चंपावत और रानीखेत में भी बसपा ने 25 प्रतिशत से अधिक वोट हासिल किए थे। 2004 के लोक सभा चुनाव में बसपा ने प्रत्याशी मैदान में नहीं उतारा था पर 2009 के लोक सभा चुनाव में भी बसपा ने करीब दस प्रतिशत मत हासिल किए थे।

इस हिसाब से देखा जाए तो बसपा भले ही जीत के प्रति आश्वस्त न करती हो पर वह कांग्रेस-भाजपा के लिए खेल बिगाड़ने वाली साबित तो हो ही सकती है।

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कांग्रेस को इस सीट पर भाजपा से कड़ी चुनौती मिलती रही है। 2004 का लोक सभा चुनाव कांग्रेस केलिए मायूस करने वाला साबित हुआ था। पर 2009 के लोक सभा चुनाव में कांग्रेस को जीत हासिल हुई।

कांग्रेस की इस जीत में पिथौरागढ़, गंगोलीहाट और चंपावत का खासा हाथ रहा। विधानसभा चुनाव 2012 में कांग्रेस ने भाजपा की छह सीटों के मुकाबले आठ सीटों पर जीत हासिल की थी।

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इस जीत का मतप्रतिशत बढ़ाने में भी इन तीन सीटों का खासा हाथ रहा। ऐसे में लोक सभा चुनाव में कांग्रेस और भाजपा दोनों को ही अपने गढ़ में बसपा की चुनौती की चिंता करनी होगी और एक दूसरे से भी जूझना होगा।
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2009 के लोक सभा चुनाव में भाजपा के प्रत्याशी को आठ विधानसभा क्षेत्रों में कांग्रेस के प्रत्याशी से अधिक वोट मिले थे। पिथौरागढ़ और गंगोलीहाट में कांग्रेस प्रत्याशी की जीत का अंतर अधिक रहा था। यही हाल चंपावत का था पर यहां बसपा को भी खासे वोट मिले।
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