पुलिस महानिदेशक बीएस सिद्धू और दारोगा निर्विकार सिंह का मामला मुख्यमंत्री दरबार तक पहुंच गया है।
मेरे पास आना चाहिए था...
बुधवार को पत्रकारों के सवालों पर मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि निर्विकार को अगर डीजीपी से कोई समस्या थी तो उसे मेरे पास आना चाहिए था।
मीडिया में बात रखकर निर्विकार ने विभाग की छवि को चोट पहुंचाई है। मुख्यमंत्री ने इसे अनुशासनहीनता माना। हालांकि सीएम ने माना कि निर्विकार के आरोपों की भी जांच कराई जाएगी।
डीजीपी बीएस सिद्धू के खिलाफ राजपुर थाने में दर्ज रिजर्व फारेस्ट की भूमि कब्जाने व पेड़ कटान के मामले में पहली जांच एसआई निर्विकार ने की थी।
निर्विकार दून में स्पेशल इंवेस्टीगेशन सेल में तैनात थे। इस बीच दारोगाओं के प्रमोशन होने थे। प्रमोशन न होने और रुद्रप्रयाग तबादला किए जाने पर निर्विकार ने डीजीपी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया।
हाईकोर्ट में पुलिस महानिदेशक के खिलाफ शपथ पत्र दाखिल कर उन्होंने आरोप लगाया कि पद का गलत इस्तेमाल करते हुए डीजीपी ने जमीन कब्जाई है।
निर्विकार ने डीजीपी पर गंभीर आरोप लगाते हुए सोमवार को प्रेस वार्ता भी की थी। उसके बाद मामला मुख्यमंत्री दरबार तक पहुंचा।
मैं नहीं झुकूंगा : निर्विकार
फोन हुई बातचीत में निर्विकार ने निलंबन की कार्रवाई को गलत बताया। निर्विकार ने कहा कि उन्होंने पुलिस या सरकारी की किसी नीति का विरोध नहीं किया है।
उन्होंने केवल एक आपराधिक छवि वाले महानिदेशक पर आरोप लगाए हैं। उन्होंने सरकार या पुलिस विभाग की पॉलिसी के खिलाफ कुछ गलत बोला हो तो अनुशासनहीनता बनती है।
डीजीपी के प्रभाव में आकर शासन ने उन्हें निलंबित कर दिया। कहा कि वे किसी भी हालत में नहीं झुकेंगे, क्योंकि वे सच की लड़ाई लड़ रहे हैं।