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उत्तराखंड: वित्त आयोग के सामने एक सुर में झलकी पहाड़ की पीड़ा, मतभेद छोड़ सभी दलों ने की पैरवी

Tue, 16 Oct 2018 08:39 AM IST
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, देहरादून
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वित्त आयोग की टीम
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15वें केंद्रीय वित्त आयोग ने सोमवार को उत्तराखंड में दस्तक दी। राज्य सचिवालय के वीरचंद्र सिंह गढ़वाली सभागार में आयोग के साथ जनप्रतिनिधियों की बैठकों का सिलसिला देरशाम तक चलता रहा।

 

आर्थिक मोर्चे पर कई दुश्वारियां झेल रहे उत्तराखंड के परस्पर विरोधी राजनीतिक दलों के स्वर समान पीड़ा बयान कर रहे थे। भाजपा, कांग्रेस व वामपंथी दलों ने राज्य के साथ हो रहे भेदभाव का जिक्र करते हुए न्याय मांगा।

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हिमालयी राज्यों के लिए स्वीकृत 1,94,821 करोड़ के राजस्व घाटे से उत्तराखंड को एक पाई तक न मिलने पर नाराजगी भी झलकी। जीएसटी में बेहतर वसूली के बावजूद राज्य को हो रही आर्थिक क्षति चर्चा के मुख्य केंद्र में रही।

इसके अलावा आपदा, ग्रीन बोनस, पलायन, पुनर्वास, कमजोर आर्थिक स्थिति की ओर आयोग के सदस्यों का ध्यान खींचा गया। पहले दिन की बैठक में नगरीय व पंचायत प्रतिनिधियों ने भी अपने मुद्दे बेबाकी से उठाए।

उत्तराखंड चुका रहा है बड़ी कीमत, भरपाई होनी चाहिए: कांग्रेस  

प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने केंद्रीय वित्त आयोग से कहा कि विकास की बलि चढ़ाकर ग्लोशियरों, नदियों, वनों के संरक्षण कर रहे उत्तराखंड को इस बलिदान का मूल्य मिलना चाहिए। उन्होंने प्रदेश को ग्रीन बोनस के तौर पर विशेष वित्तीय सहायता देने की जोरदार वकालत की। उन्होंने कहा कि 14वें वित्त आयोग ने उत्तराखंड को राजकोषीय घाटे के एवज में वित्तीय अनुदान से वंचित करके प्रदेश के साथ अन्याय किया।

जबकि 12वें और 13वें वित्त आयोग ने इस मद में प्रदेश को करीब 32 हजार करोड़ रुपये वित्तीय लाभ दिया। उन्होंने आयोग से  प्रदेश के भौगोलिक, सामरिक और आर्थिक हालातों को ध्यान में रखकर सिफारिश करने का अनुरोध किया। उन्होंने उत्तराखंड को केंद्र पोषित योजनाओं में विशेष अनुदान देने की मांग उठाई। चिंता जताई कि इसमें कमी आने से प्रदेश को 2500 करोड़ का नुकसान हुआ। उन्होंने कहा कि हर साल होने वाली प्राकृतिक आपदाओं से भारी नुकसान होता है, जिसके लिए एनडीआरएफ और एसडीआरएफ में अनुदान की राशि को बढ़ाया जाना चाहिए। 

कांग्रेस ने ये सुझाव भी दिए
-राज्य निर्माण की अवधारणा, कमजोरियां व अपेक्षाओं का ध्यान रखा जाए
-देश को राज्य से मिल रही पर्यावरणीय सेवाओं के एवज में वित्तीय अनुदान
-देश की रक्षा सुरक्षा के मामलों में राज्य के योगदान को ध्यान में रखा जाए
-प्रदेश में अवस्थापनाओं सुविधाओं और कनेक्टिविटी के लिए मिले अतिरिक्त सहायता
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किसने क्या कहा जानिए

आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों ने तमाम मुद्दों पर रिएक्ट किया। हम आशावान हैं कि राज्य हितों को पंद्रहवें वित्त आयोग संरक्षण करेगा। 14वें वित्त आयोग में राज्य को बड़ा नुकसान हुआ। राजकोषीय घाटे में 47,275 करोड़ का आंकलन हुआ।
-मुन्ना सिंह चौहान, विधायक व प्रदेश प्रवक्ता भाजपा

आयोग ने हमारे सुझावों को बहुत गंभीरता से सुना। कई मसलों पर आयोग के सदस्य हमसे सहमत दिखे। हमें पूरा भरोसा है कि आयोग उत्तराखंड सरीखे हिमालयी राज्य की व्यावहारिक कठिनाइयों के समाधान और वाजिब सवालों के सही जवाब अपनी सिफारिशें के जरिए देगा।
 सूर्यकांत धस्माना, प्रदेश वरिष्ठ उपाध्यक्ष, कांग्रेस

राज्यों को मजबूत किए बगैर देश को मजबूत नहीं किया जा सकता। उत्तराखंड की भौगोलिक विशिष्टता और स्थानीय जरूरत है, उस पर 15वें वित्त आयोग को विशेष दृष्टि रखनी चाहिए। उस आधार पर विशेष वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराने चाहिए। जीएसटी लागू होने और 14वें वित्त आयोग की सिफारिशों से वित्तीय घाटा बढ़ा है।
- समर भंडारी, राज्य सचिव, भाकपा

 14वें वित्त आयोग ने हमारे से सबसे ज्यादा अन्याय किया। आयोग से अनुरोध किया गया कि राजकोषीय घाटा अनुदान में जो पूर्व में गलती हुई है, वो इस बार न हो। प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के एवज में अतिरिक्त वित्तीय सहायता मिलनी चाहिए।
-बची राम कौंसवाल, सदस्य, राज्य कमेटी, माकपा
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