अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत नरेंद्र गिरी
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने स्वामी अच्युतानंद तीर्थ, वासुदेवानंद सरस्वती और नरेंद्रानंद सरस्वती को शंकराचार्य मानने से साफ इनकार कर दिया। परिषद ने तीनों संतों को सलाह दी है कि वे शंकराचार्य पदनाम का दुरुपयोग करना तत्काल बंद करें। शंकराचार्य के रूप में तीनों को ही आने वाले प्रयाग अर्द्धकुंभ और हरिद्वार कुंभ में प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा।
बड़ा अखाड़ा उदासीन में पत्रकारों से वार्ता करते हुए अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत नरेंद्र गिरी ने कहा कि आदि जगद्गुरु शंकराचार्य का नाम बड़े सम्मान से लिया जाता है। संत जगत की वे सबसे बड़ी हस्ती हैं। शंकराचार्य पद की केवल चार पीठ हैं, जिन पर तीन शंकराचार्य आसीन हैं। द्वारिका और ज्योर्तिपीठ का प्रभार स्वरूपानंद सरस्वती के पास है।
जगन्नाथ पुरी में मिश्रानंद सरस्वती और श्रृंगेरी पीठ पर स्वामी भारती तीर्थ आसीन हैं। इनके पद पर रहते अन्य कोई भी इन पीठों पर अपना दावा प्रस्तुत करता है तो ऐसा लगता है, मानो कोई जनपद के गली मोहल्ले में जाकर स्वयं को मुख्यमंत्री बताने लगे।