प्रदेश में सभी चिकित्सकों को डायनमिक एश्योर्ड करियर प्रोग्रेशन (डीएसीपी) का लाभ दिया जाएगा। प्रांतीय चिकित्सा सेवा संघ (पीएमएचएस) के अनुरोध पर राज्य सरकार डीएसीपी का लाभ देते वक्त पहली बार चिकित्सकों को इसमें राहत देने जा रही है। हालांकि यह लाभ केवल पहली बार मिलेगा। अगली बार से दुर्गम में निर्धारित वर्षों की सेवा पूरी किए बिना चिकित्सकों को इसका लाभ नहीं मिलेगा।
चार जून को हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में डीएसीपी को मंजूरी मिली थी। जिसके बाद सरकार ने प्रदेश के डॉक्टरों को डायनामिक एश्योर्ड करियर प्रोग्रेशन (डीएसीपी) का लाभ दिया था। एक जनवरी 2015 से पहले नियुक्ति पाने वाले सभी डॉक्टरों को इसका लाभ मिलना था। हालांकि इसमें दुर्गम में निर्धारित वर्षों की सेवा की अनिवार्यता का प्रावधान भी किया गया। जिसके अनुसार, चार वर्ष की पदोन्नति में दो वर्ष, आठ वर्ष की पदोन्नति में पांच वर्ष, 13 वर्ष की पदोन्नति में सात वर्ष और 20 वर्ष की पदोन्नति में नौ साल की सेवा दुर्गम में होनी अनिवार्य थी।
सरकार के इस निर्णय से संघ के अध्यक्ष, महासचिव समेत बड़ी संख्या में चिकित्सकों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा था। इन चिकित्सकों ने दुर्गम में बिल्कुल भी सेवा नहीं दी है। जिसके चलते चिकित्सक पहली बार नियमों को शिथिल करने की मांग कर रहे थे। संघ की मांग पर स्वास्थ्य मंत्री सुरेंद्र सिंह नेगी ने मुख्यमंत्री हरीश रावत से अनुरोध किया था। सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री ने इस पर अपनी सहमति जता दी है। जिसके बाद स्वास्थ्य मंत्री ने पुराने शासनादेश को संशोधित करने और नया प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए हैं। शासन स्तर पर नया प्रस्ताव तैयार करने की कवायद चल रही है।
डीजी बनने को तैयार नहीं अफसर
स्वास्थ्य महानिदेशालय के अधिकारी प्रभारी स्वास्थ्य महानिदेशक के पद पर काम करने को तैयार नहीं हैं। स्वास्थ्य महानिदेशक डा. कुसुम नरियाल करीब एक माह की छुट्टी पर हैं। उनकी अनुपस्थिति में प्रभारी डीजी का चार्ज डा. आभा ममगाई को सौंपा गया। हालांकि उन्होंने चार्ज लेने से इंकार कर दिया। इसके बाद डा. जीसी पांडे ने भी चार्ज नहीं लिया। अब डा. एससी पंत को चार्ज देने की तैयारी है।
पीएमएचएस ने मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री से पहली बार शिथिलीकरण का अनुरोध किया है। सरकार ने चिकित्सकों की ड्यूटी जहां लगाई, उन्होंने वहां सेवा दी। मैदान में सेवा देने वाले चिकित्सकों ने भी पूर्ण मनोयोग से कार्य किया है। इसलिए उन्हें भी नुकसान नहीं होना चाहिए। अगली बार से बिना दुर्गम की सेवा के लाभ नहीं मिलेगा।
-डॉ. संजीव गोस्वामी, अध्यक्ष, पीएमएचएस