बड़ा अखाड़ा पंचायती उदासीन के लापता कोठारी महंत मोहनदास का 18 दिन बाद भी पता नहीं चल पाने पर संतों ने पुलिस के प्रति नाराजगी जताई है। अखिल भरारतीय अखड़ा परिषद के आह्वान पर बुलाई गई संत समाज की बेठक में महंत का अभी तक पता नहीं चलने पर चिंता जताई गई।
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संतों ने तय किया था कि मंगलवार की शाम चार बजे से हरकी पैडी पर अनिश्चतिकालीन ध्रारना शुरु किया जाएगा लेकिन पुलिस अघिकारियों द्वारास दो दिन का समय मांगने पर अब पांच अक्टूबर से हरकी पैडी पर धरना शुरु करने का निण्रय लिया गया। बैठक में भारत साधू समाज और षडदर्शन साधू समाज से जुड़े संत भी शमिल हुए।
पूर्व घोषित कार्यक्रम के अनुसार सोमवार की शाम कनखल स्थित बड़ा अखाड़ा परिसर में हुई संतों की बैठक में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमहंत नरेंद्र गिरि ने कहा कि 18 दिन बीत जाने के बाद भी महंत मोहनदास का पता नहीं चलना गंभीर मामला है।
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श्रीमहंत नरेन्द्र गिरि ने कहा कि मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत अगर चाहे तो सीबीआई जांच करा सकते हैं इसमें हमें कोई ऐतराज नहीं है क्योंकि हमारा मुख्य उद्देश्य तो लापता कोठारी महंत मोहनदास को ढूंढना हैं।
अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय महामंत्री महंत हरिगिरि महाराज ने कहा कि किसी भी संत के साथ अगर कोई घटना घटित होती है तो अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद उसके साथ हैं। करीब तीन घंटे चली बैठक में जब मंगलवार से हरकी पैडी पर धरना देने का प्रस्ताव पारित किया गया तो सीओ जेपी जुयाल संतों से मिलने पहुंचे उन्होंने संत को तलाशने में दो दिन का और समय मांगते हुए उन्हें शीघ्र कार्रवाई का आश्वासन दिया ।
इस पर पांच अक्टूबर तक के लिए धरने का प्रस्ताव टाल दिया गया। बैठक में विश्व सनातन परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमहंत सुरेन्द्रनाथ अवधूत ने लापता कोठारी महंत मोहनदास के बारे में चिन्ता व्यक्त करते हुए कहा कि 410 घंटे बीत जाने के बाद भी महंत का पता नहीं चल पाना चिंता की बात है।
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत नरेंद्र गिरि महाराज ने कहा कि फर्जी संतों की एक और सूची दीवाली के बाद जारी की जाएगी। पत्रकारों से वार्ता करते हुए उन्होंने कहा कि इस बारे में तेजी से काम चल रहा है।
बैठक में कैलाशानंद ब्रह्मचारी, महंत रघु मुनि, अखाड़ा परिषद राष्ट्रीय उपाध्यक्ष महंत बलवंत सिह, श्रीमहत प्रेम गिरि, मुखिया महंत भगतराम, स्वामी कृष्णानंद, स्वामी रामस्वरूप ब्रह्मचारी, महंत देवानंद, कोठारी महंत गोपाल सिंह, स्वामी हरिचेतनानंद, स्वामी कपिल मुनि, महंत कमलदास, महंत सुखदेव मनि, महंत भगवानदास, महंत दामोदर दास, महंत गंगादास, महंत निरंजनदास, महंत जयेन्द्र मुनि, स्वामी आशीष गिरि, महंत त्रिवेणी दास, मुखिया महंत जगजीत सिंह, महंत विष्णुदास, महंत रामशरणदास, महंत सागर मुनि आदि संत मौजूद रहे।