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हरिद्वार: 2021 में कुंभ को लेकर संतों ने किया मंथन, सरकार से की छह माह पहले काम पूरा कराने की मांग

Thu, 05 Oct 2017 11:11 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, हरिद्वार
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2021 में हरिद्वार में होने वाले महाकुंभ की व्यवस्थाओं को लेकर साधू, संतों ने मंथन शुरू कर दिया है। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के बैनर तले हुई संतों की बैठक में महाकुंभ से पहले हरिद्वार-दिल्ली हाईवे चौड़ीकरण का काम पूरा करने, कुंभ क्षेत्र का विस्तार और कुंभ स्नान के लिए आने वाले यात्रियों को 250 किलोमीटर की निशुल्क यात्रा सेवा उपलब्ध कराने की मांग की गई। बैठक में पेशवाई को नीलधारा टापू से निकालने के लिए विचार किया गया।  
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माया देवी प्रांगण में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के  अध्यक्ष श्रीमहंत नरेंद्र गिरि की अध्यक्षता और  महामंत्री श्रीमहंत हरि गिरि के संचालन में हुई बैठक में कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव रखे गए। जिसमें श्रीमहंत हरि गिरि ने राज्य सरकार से 40 किलोमीटर लंबे नए स्नान घाट बनाने की मांग उठाई। भीमगोडा बैराज से लेकर नीलधारा बंदे तक बैरागी कैंप, दक्षदीप और चंडीघाट आदि क्षेत्रों में नए स्नान घाट और पुलों का निर्माण कराने को प्रस्ताव पर सहमति बनी।

इन सभी के साथ सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा हाईवे निर्माण की धीमी गति पर आक्रोश जताते हुए संतों ने मांग उठाई कि महाकुंभ से पूर्व रिंग रोड बनायी जाए, जोकि रुड़की से बहादराबाद, श्यामपुर, मोतीचूर तक 6 लेन हाइवे बने। संतों ने हरिद्वार में कुंभ भूमि पर अतिक्रमण के साथ विस्तार होने पर कुंभ के लिए घटती जमीन पर चिंता जताते हुए पर्याप्त भूमि के इंतजाम कराने की मांग सरकार से की।
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संतों ने तीर्थ नगरी में उपेक्षित पौराणिक धर्म स्थलों के जीर्णोद्धार की भी मांग की। उन्होंने कुंभ क्षेत्र में 40 हजार तीर्थ यात्रियों के ठहरने के लिए रैन बसेरा बनाने की सलाह दी। बैठक में एकमत होकर कहा कि कोई संत बड़ा या छोटा नहीं है।
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कुंभ में यात्रियों के न पहुंचने पर जताया रोष

संतों ने कहा कि हरिद्वार कुंभ के लिए इंतजाम न होने पर यात्रियों को रुड़की, लक्सर, श्यामपुर या ऋषिकेश में रोक दिया जाता है। ऐसे में यहां पर यात्री नहीं आ पाते। इसको लेकर संतों ने प्रशासन को चेतावनी दी कि इस बार रुड़की या अन्य स्थान पर यात्रियों को रोका गया तो इसका विरोध किया जाएगा।  

सुरंग बनी तो बाजार का भार कम होगा  
संतों की महत्वपूर्ण मांग बहादराबाद से रोशनाबाद की ओर से आने वाले यातायात को सफल संचालित करने के लिए औद्योगिक क्षेत्र से सुरंग बनाने की मांग उठाई। संतों ने इस पर सहमति देते हुए कहा कि सुरंग बनने से बाजारों में भीड़ नहीं होगी, इसलिए यह सुरंग बनायी जानी जरूरी है। 

ईमानदारी पर दिया जोर  
सरकार और सरकार के अधिकारी कुंभ मेले के कार्यों को ईमानदारी से पूरा करें। संतों ने स्पष्ट तौर पर चेतावनी देते हुए कहा कि अब तक जो कुछ हुआ वो हुआ, लेकिन इस बार निर्माण कार्यों में लापरवाही या घटिया काम हुए तो संत इसका विरोध करेंगे।  

कुंभ को शहर से बाहर ले जाने पर हुुआ गहरा मंथन  
हरिद्वार। स्थानीय लोगों की सुविधा को देखते हुए इस बार इलाहाबाद कुंभ की तर्ज पर संतों को बैरागी कैंप, नीलधारा टापू, दक्ष दीप में ठहराए जाने पर विस्तार से चर्चा हुई। कुंभ मेले में लगने वाली छावनियां यथावत जगह रहेंगी और यही से शाही स्न्नान के लिए जाने वाली शाही सीधे हरकी पैड़ी पहुंचेगी। अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष नरेंद्र गिरी महाराज ने कहा कि अब समय आ गया है कि कुंभ को हरिद्वार क्षेत्र से बाहर नीलधारा क्षेत्र में ले जाया जाए।  हालांकि अखाड़ा परिषद ने अभी इस प्रस्ताव को पास नहीं किया है।

बैठक में यह संत रहे मौजूद  
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष महंत बलवंत सिंह, जूना अखाड़े के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रेमगिरि, निर्मोही अखाड़े के महंत रामशरण दास, नया उदासीन अखाड़े मुखिया महंत भगतराम, महंत त्रिवेणी दास, कोठारी महंत गोपाल सिंह, महंत शिव शंकर गिरि, महंत हनुमान बाबा, महंत आशीष गिरि, महंत गोल्डन बाबा, महंत सुखदेव मुनि, महंत भगवान दास, स्वामी चिदविलासानंद, महंत रघुवीर दास, महंत मोहनदास रामायणी, महंत जयेंद्र मुनि आदि शामिल हुए।
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