अखाड़ा परिषद की ओर से हाल ही में फर्जी संतों की सूची जारी होने के बाद से महंत मोहनदास को धमकियां मिल रही थी। और अब उनके साथ जो घटना घटित हुई है उससे किसी अनहोनी की आशंका जताई जा रही है।
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ऑपरेशन के लिए हरिद्वार से मुंबई जाते समय श्री पंचायती बड़ा अखाड़ा उदासीन कनखल के कोठारी तथा अखाड़ा परिषद के प्रवक्ता महंत मोहनदास संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हो गए।
अखाड़ा परिषद की ओर से हाल ही में फर्जी संतों की सूची जारी होने के बाद से महंत मोहनदास को धमकी मिलने की बात कहकर उनके अपहरण की आशंका जताई है। उधर, पुलिस सभी संभावनाओं को देखते हुए जांच करने की बात कह रही है। महंत की तलाश में एक टीम दिल्ली और दूसरी भोपाल भेजी गई है।
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कोच में नहीं मिले महंत मोहनदास
ट्रेन से हरिद्वार से मुंबई के लिए सवार हुए थे मोहनदास
- फोटो : अमर उजाला
कोठारी महंत मोहनदास शुक्रवार रात करीब दो बजे स्पेशल लोकमान्य तिलक एक्सप्रेस ट्रेन से हरिद्वार से मुंबई के लिए सवार हुए थे। उन्हें आश्रम का सेवक चतुरदास ट्रेन में बैठाकर आया था। महंत के लापता होने का पता तब चला जब भोपाल पहुंचने पर वहां का एक सेवादार महंत को भोजन देने के लिए ट्रेन में चढ़ा।
भोपाल में पहले से ही कोठारी महंत को भोजन उपलब्ध कराने की तैयारी भक्तों ने की थी, लेकिन शनिवार रात आठ बजे भोपाल पहुंची ट्रेन में कोठारी मंहत मोहनदास नहीं थे। सेकेंड एसी कोच में सीट नंबर 21 पर उनका रिजर्वेशन था, लेकिन वे ट्रेन में मिले ही नहीं।
उनके लापता होने जानकारी हरिद्वार श्री पंचायती अखाड़े में दी गई। कोठारी महंत के लापता होने की सूचना मिलते ही संत समाज में हड़कंप मच गया। उनका मोबाइल भी बंद आ रहा था।
फर्जी संतों की सूची जारी करने के बाद से मिल रही थी धमकी
akhara parishad
रात में ही मामले की सूचना पुलिस को दी गई। सुबह से संतों, नेताओं और शहर के अन्य लोगों का अखाड़े में तांता लगा रहा। हर कोई महंत मोहनदास के बारे में जानने को आतुर था।
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष नरेंद्र गिरी ने एसएसपी कृष्ण कुमार वीके को बताया कि पिछले दिनों परिषद की ओर से फर्जी संतों की सूची जारी करने के बाद से महंत मोहनदास को फोन पर धमकी दी जा रही थी। महंत मोहनदास अखाड़ा परिषद के प्रवक्ता भी हैं और अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष के काफी करीबी माने जाते हैं।
एसएसपी कृष्ण कुमार वीके ने बताया कि पुलिस सभी संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए काम कर रही है। जीआरपी और आरपीएफ को भी ट्रैक पर कांबिंग कराने को कहा गया है। दुर्घटना, वैराग्य और अनहोनी तीनों पहलुओं पर काम किया जा रहा है। महंत की तलाश में टीमों को दिल्ली और भोपाल मध्यप्रदेश भेजा गया है।
महंत मोहनदास इलाज कराने के लिए यहां से अकेले ही रवाना हुए थे जबकि इससे पहले मुंबई में उनके साथी महंत दामोदरदास पहले ही पहुंच चुके हैं। मोहन दास मुंबई में अपने पेट और यूरीन की तकलीफ के इलाज के लिए जा रहे थे।
सोमवार को उनका मुंबई अस्पताल में ऑपरेशन होना था। इससे पहले वे दो सितंबर को भी मुंबई गए थे, लेकिन भगवान चंद्राचार्य की जयंती के कारण और अखाड़ा वापस आ गए थे जिसके बाद तीन अक्तूबर में उनकी हरिद्वार वापसी तय थी।
एक संदिग्ध संत पुलिस के शक के दायरे में है। जिस कोच में कोठारी महंत बैठे थे। उसी कोच में उनकी पास की सीट में एक और संत बैठे थे। महंत के लापता होने के बाद संत का भी कुछ अता पता नहीं चल पाया है। महंत को छोड़ने गए सेवक चतुरदास ने बताया कोच में एक संत पहले से मौजूद थे। अब पुलिस संदिग्ध संत की तलाश में जुट गई है।