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अखाड़ा परिषद का बड़ा फैसला, फर्जी शंकराचार्यों को कुंभ नगरों में प्रवेश नहीं     

Mon, 01 May 2017 08:57 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, हरिद्वार
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Demo Pic - फोटो : demo
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अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने चार शंकराचार्यों के अतिरिक्त अन्य सभी शंकराचार्य नामा संतों को चेतावनी दी है कि वे चारों कुंभ नगरों में कुंभ के अवसर पर प्रवेश न करें। ऐसा होने पर साधु समाज उन्हें मेला क्षेत्र से ही बाहर खदेड़ देगा।
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काशी सुमेरू पीठाधीश्वर शंकराचार्य नरेंद्रानंद सरस्वती को चेतावनी दी गई है कि वे एक महीने में अखाड़ा परिषद से माफी मांगे। ऐसा नहीं होने पर उन्हें भी अच्युतानंद की तरह अखाड़ा परिषद से बहिष्कृत कर दिया जाएगा।   
    
अखाड़ा परिषद की प्रयाग में हुई बैठक की जानकारी परिषद अध्यक्ष श्रीमहंत नरेंद्र गिरि ने प्रदान की। उन्होंने कहा कि फर्जी रूप से शारदा पीठाधीश्वर बने स्वामी अच्युतानंद को पहले ही अखाड़ा परिषद से बहिष्कृत किया जा चुका है।
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उनके आयोजन में अध्यक्षता करने वाले सुमेरू पीठाधीश्वर काशी के नरेंद्रानंद सरस्वती को अखाड़ा परिषद ने चेतावनी दी है कि वे एक महीने के भीतर परिषद से माफी मांगे।
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फर्जी शंकराचार्यों को भूमि आवंटन नहीं

demo pic - फोटो : demo
परिषद ने उन्हें पहले ही मना किया था कि वे अच्युतानंद के पट्टाभिषेक समारोह में भाग लेने न जाए। इसके बावजूद वे स्वयं भी गए और काशी विद्वत परिषद को धोखा देकर कुछ पंडितों को भी साथ ले गए।

अखाड़ा परिषद ने पारित प्रस्ताव में विद्वत परिषद से भी आग्रह किया है कि वह हरिद्वार के आयोजन को फर्जी करार दे। अच्युतानंद को किसी भी सूरत में शंकराचार्य की मान्यता संत समाज के द्वारा नहीं दी जाएगी।

उन्होंने बताया कि चार अधिकृत शंकराचार्यों के अलावा अन्य जो भी संत शंकराचार्य नाम धारण कर प्रयाग अथवा अन्य कुंभ नगरों में आएगा उसे नगर प्रवेश से ही रोक दिया जाएगा। ऐसे संत कुंभ मेलों में सामान्य संत के रूप में अवश्य आ सकते हैं। कुंभ मेला भूमि पर फर्जी शंकराचार्यों को भूमि आवंटन नहीं करने दिया जाएगा।       

श्रीमहंत नरेंद्र गिरि ने बताया कि संगम तट पर स्थित किला सेना से खाली कराने का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा गया है। यह किला सेना के किसी काम नहीं आ रहा और पुरातत्व महत्व का विषय है, इसे पुरातत्व क्षेत्र घोषित कर आम श्रद्घालुओं के दर्शनार्थ खोला जाना चाहिए। इसी प्रकार कुंभ मेले की जो भूमि सेना के पास है वह भी खाली कराकर अखाड़ा परिषद को सौंपी जाए।     
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