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मसूद अजहर की 'हिरासत' से फिर याद आए कंधार के वो आठ दिन

Fri, 15 Jan 2016 09:12 PM IST
राकेश शर्मा/अमर उजाला, देहरादून
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पाकिस्तान में आतंकी मसूद अजहर की हिरासत की खबर ने 24 दिसंबर 1999 में एयर इंडिया के विमान अपहरण कांड में आठ दिन तक मानसिक यातनाएं झेलने वाले देहरादून के अरुण नैथानी के जख्म हरे कर दिए हैं।
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अरुण नैथानी के साथ उनके परिवार के पांच अन्य लोग भी उसी विमान में सवार थे। अरुण नैथानी का कहना है कि पाकिस्तान में मसूद अजहर को हिरासत में लेने की खबर मीडिया में आ रही है। पर उन्हें पाकिस्तान की नियति पर शक है कि वो मसूद अजहर के खिलाफ कोई कार्रवाई करेगा।

नैथानी परिवार को लगता है कि आतंकवाद पर अंतर्राष्ट्रीय दबाव को कम करने के लिए पाक की यह चाल हो सकती है। देहरादून के चंद्रलोक कॉलोनी निवासी उद्यमी अरुण नैथानी बताते हैँ कि आज भी उस पल को याद कर आंखें नम हो जाती है।
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अपहरण के समय से लेकर और उनके पूरे परिवार की आंखों में 24 दिसंबर 1999 को बंधक बनाने की दहशत और 31 दिसंबर को रिहाई का वो लम्हा आज भी अच्छे से याद है।
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जानिए, आतंकी कैसे करते थे मानसिक टार्जर

अरुण नैथानी एयर इंडिया के विमान से पत्नी, बेटी, भाई, भाभी और भतीजे के साथ नेपाल भ्रमण कर लौट रहे थे। पांच आतंकियों ने विमान को हाईजैक कर लिया था।

विमान में मौजूद 150 यात्रियों से आतंकियों ने बताया था कि कश्मीर जेल में बंद मौलाना को रिहा कराना उनका मकसद है। उस समय पता नहीं था कि उस मौलाना का नाम मसूद अजहर है।

दिन बीतने के साथ उम्मीदों पर आशंका भारी होने लगी थी। आतंकी लगातार यह कहकर उन्हें मानसिक रूप से परेशान कर रहे थे कि भारत सरकार की नजर में वो भेड़ बकरियों के अलावा कुछ नहीं है।
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अजित डोवाल ने गढ़वाली में जाना था हाल

अरुण कहते हैं कि हमें अपनी अपनी सरकार पर पूरी उम्मीद थी। नैथानी का कहना है कि अब देखना यह है कि पाकिस्तान आतंकी के खिलाफ कुछ कार्रवाई करेगा या मामला ठंडा होने के बाद छोड़ देगा।

विमान अपहरण कांड के आपरेशन के बाद अजित डोभाल ने अपने टीम के साथ रिहा हुए यात्रियों से बात की थी। उद्यमी अरुण नैथानी कहते है कि कंधार में अकेले डोभाल से उनकी गढ़वाली में बातचीत हुई थी। गढ़वाली भाषा में ही उन्हें अपना दर्द और खुशी बताई थी।
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