सरकारी अस्पताल में नहीं विशेषज्ञ डॉक्टर
उत्तराखंड में एम्स को छोड़कर किसी भी मेडिकल कालेज में मेडिकल अंकोलॉजी विभाग और मेडिकल अंकोलॉजिस्ट नहीं हैं। अधिकांश मेडिकल कालेजों में रेडियोथैरेपी मशीन भी नहीं है। अधिकांश अस्पतालों में रेडिएशन स्पेशलिस्ट और सर्जन कीमोथेरेपी करते हैं। इसी तरह सर्जिकल अंकोलॉजी (कैंसर सर्जरी के डॉक्टर) का भी अभाव है।
चिकित्सक बोले, मेडिकल कॉलेज में हो इलाज की सुविधा
एम्स के चिकित्सकों का सुझाव है कि कैंसर के उपचार के लिए सरकार के स्तर पर ठोस नीति बनाई जानी चाहिए। राज्य के मेडिकल कॉलेज में सर्जिकल अंकोलॉजी विभाग स्थापित किया जाएं और चिकित्सकों की भर्ती की जाए। जिससे मरीज को घर के निकट के मेडिकल काॅलेज में कैंसर का इलाज मिल सके। कैंसर से संबंधित विशेष जागरूकता अभियान चलाया जाएं। कैंसर के गरीब मरीजों को इलाज के लिए वित्तीय मदद दी जाए। बिना साक्ष्य के कैंसर के सफल इलाज का दावा करते वाले नीम-हकीम और संस्थानों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाए।