बायोप्सी विफल होने पर भी कारगर
यह प्लेटफार्म तब भी प्रभावी है जब बायोप्सी विफल हो जाती है। कई बार खून में कैंसर का डीएनए नहीं मिलता या रीढ़ की हड्डी में बायोप्सी खतरनाक होती है। इस स्थिति में प्लेटफार्म प्रकाशित शोध से मिली जानकारी का उपयोग करता है। इससे बिना बायोप्सी के भी कैंसर के दवाओं से बचने के तरीकों का पता चल जाता है। यह एक महत्वपूर्ण लाभ है जो मरीजों के लिए नया रास्ता खोलता है।
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गंभीर मरीज के इलाज में मिली सफलता
प्रो. जैन के अनुसार एक 63 वर्षीय मरीज को आरईटी-फ्यूजन थायराइड कैंसर था। सेल्परकैटिनिब दवा के बाद कैंसर ने प्रतिरोध विकसित कर लिया था। लिक्विड और टिशू बायोप्सी नकारात्मक आई, जबकि रीढ़ की बायोप्सी खतरनाक थी। मरीज का दिल पहले से कमजोर था, जिससे कई दवाएं जोखिम भरी थीं। डॉक्टर के पास कोई मजबूत विकल्प नहीं थे। ऐसे में विकसित प्लेटफार्म के जरिए 4 घंटे में सबसे कारगार दवाओं का संयोजन प्रस्तुत किया। भविष्य में व्यक्तिगत एमआरएनए वैक्सीन डिजाइन करने, दवाओं के दुष्प्रभाव की भविष्यवाणी करने आदि पर काम किया जा रहा है।