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तारों की पूजा कर खोला अहोई अष्टमी व्रत

Thu, 16 Oct 2014 10:35 AM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
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राजधानी देहरादून में अहोई अष्टमी का व्रत तारों की पूजा के साथ बुधवार को पूरा हो गया। सुबह महिलाओं ने स्नान-पूजन के साथ बच्चों के दीर्घायु की कामना की।
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फूल और धूप से किया पूजन
व्रतधारी महिलाओं ने गेरू से अहोई माता की आकृति बनाकर शुद्ध कलश में जलभर कर फूल और धूप आदि से पूजन किया। अहोई माता के पोस्टर लगाकर शाम को दोबारा पूजा की गई। इसके बाद हलवा आदि का प्रसाद बना।

अब तक बेटों के लिए रखा जाने वाला यह व्रत इस बार महिलाओं ने बेटियों के लिए भी रखा। उत्तराखंड विद्वत सभा आचार्य भरत राम तिवारी ने बताया कि इस व्रत में तारे की मान्यता होती है। उसकी पूजा के बाद ही महिलाएं व्रत खोलती हैं।
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हर व्रत में महिलाएं चांदी की माला बनाकर उसमें दो-दो मोती बढ़ाती रहती हैं। सुबह से व्रत रखने वाली महिलाओं ने शाम को व्रत कथा सुनी। इसके पश्चात तारे की पूजा की गई।

ये है व्रत कथा
प्राचीन काल में एक साहूकार की पत्नी थी। उनके सात बेटे थे। दिवाली से आठ दिन पहले घर की पुताई करने के लिए वह खदान से मिट्टी लेने जाती हैं। इस बीच उनकी कुदाल से स्याही का बच्चा मर जाता है।

स्याही की मां के श्राप से कुछ ही माह में साहूकार के सभी बेटों की मौत हो जाती है। तब बुजुर्ग महिलाएं साहूकार की पत्नी को अहोई अष्टमी का व्रत रखने की सलाह देती हैं। अहोई माता का व्रत और पूजन से महिला को दोबारा सात बेटों की प्राप्ति होती है।
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