काश्तकार के फसलों के नुकसान को देखते हुए शुरू की गई प्रधानमंत्री कृषि बीमा योजना देहरादून जिले में ही दम तोड़ती नजर आ रही है। रबी की फसल की बुआई के एक माह बाद जिले का एक भी काश्तकार योजना के तहत कवर नहीं हो सका है।
जबकि, इस वर्ष ज्यादातर इलाकों में सिंचाई के अभाव में गेहूं का अंकुर तक नहीं फूट सका। साथ ही काश्तकारों को अब तक खरीफ की फसल की बुआई के दौरान हुए नुकसान की भरपाई भी नहीं हो सकी है। ऐसे में काश्तकार स्वयं को ठगा सा महसूस कर रहे हैं।
सिंचाई के बेहतर संसाधन नहीं होने से जिले का एक बड़ा भू-भाग आज भी कृषि के लिए पूरी तरह बारिश पर ही निर्भर है। लेकिन नवंबर और दिसंबर माह में बारिश नहीं होने से ज्यादातर इलाकों में गेहूं की फसल सूखे की भेंट चढ़ गई। इन फसलों के लिए काश्तकारों ने किसान क्रेडिट कार्ड पर महंगा लोन लिया था। वहीं, विभागीय आंकडे़ पर गौर किया जाए तो इस वर्ष प्रधानमंत्री कृषि बीमा योजना के तहत रबी की फसल से संबंधित एक भी काश्तकार कवर नहीं किया गया। ऐसे में काश्तकारों को अब कर्ज का भूत सताने लगा है।
विभागीय अधिकारियों का कहना है कि सहकारी समितियों और बैंकों से किसान क्रेडिट कार्ड पर लिए गए लोन से संबंधित रिपोर्ट नहीं मिलने से बीमा नहीं कराया जा सका। साथ ही योजना के तहत जिले में खरीफ की फसल (मटर, आलू, फरासबीन, अदरक) से संबंधित लगभग 4465 किसानों का बीमा किया गया था। रोग की चपेट में आने से अन्य कारणों से फसल का एक बड़ा हिस्सा तबाह हो गया था। जिसकी एवज में काश्तकारों को तीन करोड़ 36 लाख रुपये के बीमा का भुगतान होना था। लेकिन यह राशि भी काश्तकारों को नहीं मिली है।
क्या कहते हैं काश्तकार
अलसी गांव के इंदर सिंह, बोहरी गांव के रण सिंह और थतेेऊ गांव के रणवीर चौहान का कहना है कि अब तक योजना का लाभ नहीं मिल सका है। काश्तकारों के ऊपर कर्ज का बोझ चढ़ता जा रहा है। अब तक खरीफ की फसल का बीमा भी नहीं मिल सका है। जबकि, बरसात में अदरक, मटर की फसल को भी खासा नुकसान पहुंचा। विभागीय अधिकारी रोजाना आज और कल में टाल देते हैं।
बैंकों को 31 दिसंबर तक बीमा संबंधी रिपोर्ट जमा करने के निर्देश दिए गए थे। लेकिन तय अवधि में रिपोर्ट जमा नहीं होने पर यह सीमा 15 जनवरी तक बढ़ा दी गई है। अब रिपोर्ट मिलने के बाद ही काश्तकारों का बीमा होगा। खरीब की फसल से संबंधित बीमा की राशि का बजट आने पर भुगतान किया जाएगा।
- विजय देवरानी जिला कृषि अधिकारी