उत्तराखंड के राजकीय डिग्री कॉलेजों में असिस्टेंट प्रोफेसर बनने के लिए उम्र का बंधन हट सकता है।
प्रदेश के विश्वविद्यालयों और सहायता प्राप्त कॉलेजों में असिस्टेंट प्रोफेसर बनने के लिए अधिकतम आयु सीमा की बाध्यता नहीं है, जबकि राजकीय डिग्री कॉलेज में अधिकतम आयु 40 साल तय की गई है। यह मामला मुख्यमंत्री के सामने उठाया गया तो उन्होंने इसका परीक्षण कराने के निर्देश दिए।
राजकीय डिग्री कॉलेजों में असिस्टेंट प्रोफेसर के 681 पद खाली हैं, जिन पर सरकार वैकल्पिक तौर पर गेस्ट टीचर रखने जा रही है। भविष्य में इन पदों पर स्थायी नियुक्ति हो सकती है। लेकिन वर्र्षों से अंशकालिक शिक्षक के तौर पर पढ़ा रहे अनेकअभ्यर्थियों के सामने उम्र की बाधा खड़ी हो गई है।
स्थायी नियुक्ति की बाट जोहते-जोहते ऐसे अभ्यर्थी 40 साल की आयु पार कर चुके हैं। स्थायी नियुक्ति में समय लगा तो तब तक आयु सीमा के किनारे खड़े कई लोग भी बाहर हो जाएंगे।
एक ही राज्य में अलग-अलग मानक
40 वर्ष से अधिक आयु वाला प्रदेश का कोई अभ्यर्थी यदि किसी राज्य विश्वविद्यालय या राज्य सरकार से सहायता प्राप्त डिग्री कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर के लिए आवेदन करता है तो उसे इंटरव्यू के लिए बुलाया जाता है। वहीं अभ्यर्थी यदि प्रदेश के राजकीय डिग्री कालेजों में आवेदन करेगा तो उसका आवेदन पत्र निरस्त कर दिया जाएगा।
हर तरफ से उठ रही आवाज
राज्य आंदोलनकारी सम्मान परिषद के पूर्व अध्यक्ष रविंद्र जुगरान ने बताया कि उन्होंने पिछले माह मुख्यमंत्री से मिलकर यह मामला उठाया था। मुख्यमंत्री से राजकीय डिग्री कॉलेजों में आयु सीमा बढ़ाने की मांग की गई थी। 2009 से पहले पीएचडीधारकों की लड़ाई लड़ रहे डॉ. वीरेंद्र बर्त्वाल ने बताया कि उन्होंने मुख्यमंत्री को इस बाबत प्रार्थना पत्र भेजा है।
यह मामला मेरे संज्ञान में आया है। संबंधित अधिकारियों को इसका परीक्षण कराने के निर्देश दिए गए हैं। पहले परिवर्तन के प्रभाव को जानना जरूरी है। उसके बाद इस पर निर्णय लिया जाएगा।
- हरीश रावत, मुख्यमंत्री