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42 पार वाले अब नहीं बन सकेंगे टीचर, बदलेगी नियमावली

Tue, 01 Nov 2016 01:44 AM IST
बिशन सिंह बोरा/ अमर उजाला, देहरादून
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टीचर - फोटो : demo pic
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उत्तराखंड के अशासकीय स्कूलों में 42 साल से अधिक आयु वाले अभ्यर्थी अब टीचर नहीं बन सकेंगे। सरकारी स्कूलों की तरह इन स्कूलों में भी टीचर बनने के लिए अधिकतम आयु सीमा 42 साल होने जा रही है। इसके लिए अशासकीय विद्यालयों में सेवा नियमावली (विनियम) में संशोधन किया जा रहा है।
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प्रदेश के अशासकीय विद्यालयों में टीचर नियुक्ति के लिए अब तक अधिकतम उम्र की कोई बाध्यता नहीं है, यदि कोई अभ्यर्थी 54 या 59 आयु वाला भी है तो वे भी नियुक्ति के लिए पात्र हैं, जबकि इन विद्यालयों में पेंशन, सेवानिवृत्ति, नियुक्ति के लिए शैक्षिक योग्यता आदि अन्य सभी अर्हता सरकारी स्कूलों के टीचरों के समान है। इसे देखते हुए अब सरकारी स्कूलों की तर्ज पर इन स्कूलों में भी अधिकतम आयु सीमा की लिमिट तय की जा रही है।
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एलटी व प्रवक्ता में जूनियर को टीचरों को मिल सकता है लाभ

टीचर - फोटो : Amar Ujala
इसके अलावा अशासकीय जूनियर हाईस्कूलों में टीचरों के तबादलों, सहायक अध्यापक एलटी व प्रवक्ता की नियुक्ति में जूनियर हाईस्कूलों के टीचरों को अनुभव का लाभ दिए जाने और स्कूल बंद होने पर टीचरों के समायोजन सहित कुछ अन्य प्रस्तावों पर भी अमल किया जा रहा है।

उत्तराखंड माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष राजे सिंह नेगी के मुताबिक विनियम में 29 संशोधनों को लेकर विभाग और संगठन की अब तक चार बैठकें हो चुकी हैं। जल्द ही कुछ बिदुंओं पर संशोधन होगा।

इनका है कहना
राजकीय की तरह अशासकीय विद्यालयों के टीचरों की नियुक्ति एवं अन्य सेवा शर्तों में एकरूपता के लिए यह किया जा रहा है। निदेशालय स्तर से इसका प्रस्ताव भेजा जा चुका है। शासन स्तर से इस पर संशोधन होना है।
- आरके कुंवर, शिक्षा निदेशक माध्यमिक शिक्षा 
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