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उत्तराखंड निकाय चुनाव के बाद कांग्रेस अध्यक्ष प्रीतम सिंह ने कहा, 'वह सारा जहर पीने को तैयार'

Fri, 23 Nov 2018 02:29 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
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pritam singh - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो
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कांग्रेस भवन में मौजूद प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह कार्यकर्ताओं से लगातार मिल रहे हैं। चेहरे के भाव थोड़ी-थोड़ी देर में बदल रहे हैं। कभी चेहरे पर हंसी दिखती है तो कभी नाराजगी भी। जगह-जगह से जीते कांग्रेस उम्मीदवार हाथ में मिठाई का डिब्बा लेकर पहुंच रहे हैं, तो प्रीतम सिंह गर्मजोशी दिखा रहे हैं। कोई हारा हुआ उम्मीदवार आ रहा है, तो उसे समझा-बुझा रहे हैं। गुस्सा भी कर रहे हैं कि प्रबंधन क्यों नहीं ढंग का हुआ।

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इन स्थितियों के बीच जब सवाल अपनी ही पार्टी के दिग्गजों के आरोपों से जुड़ा आ रहा है तो प्रीतम के सारे भाव पीछे चले जा रहे हैं। आक्रामक भाव ही अब हावी है। संयमित होने की कोशिश भी करते हैं, लेकिन राष्ट्रीय महासचिव हरीश रावत और पूर्व स्पीकर गोविंद सिंह कुंजवाल के लिए नाराजगी छिपाए नहीं छिपती। प्रीतम कहते हैं-हम जहां हारे हैं, वहां की हार का जहर मैं पी लूंगा, मगर जहां हम जीते हैं, उसकी भी तो बात हो। फिर आगे कहते हैं-जो अब नसीहत दे रहे हैं, उनके बारे में मैं बोलना शुरू करूंगा तो बात दूर तक जाएगी।

कांग्रेस में नगर निकाय चुनाव के नतीजों के बाद घमासान की सी स्थिति है। पार्टी का रोग पुराना है। हरीश रावत और उनके समर्थक नेताओं से प्रीतम सिंह की ‘भिड़ंत’ हो रही है। टिकट आवंटन, चुनाव प्रबंधन जैसे विषय पर बहस का दौर चल निकला है। मगर मकसद सुधार या सकारात्मक नहीं है, बल्कि घेराबंदी की मंशा ज्यादा दिखती है। चुनाव में गढ़वाल से लेकर कुमाऊं तक सबसे ज्यादा दौड़ने भागने वाले प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह आहत दिखते हैं। वह कहते हैं-हमने हवन कुंड में आहुति डालने के लिए सबको आमंत्रित किया था। अब किसी ने आहुति डाली, कोई अन्यत्र व्यस्त रहा। वह सवाल करते हैं-कैसे आमंत्रण की बात कर रहे हैं दिग्गज नेता। उनका इशारा हरीश रावत की तरफ है। वह फिर बताना शुरू करते हैं। 27 अक्तूबर को उन्हें पत्र लिखा गया था, जिसमें कहा गया था कि प्रचार के लिए तारीख बता दें। दिल्ली और असम में भी बात की गई। 12 नवंबर को दृष्टिपत्र जारी करने के कार्यक्रम में भी बुलाया। बकौल प्रीतम-जब रावत जी उपलब्ध हुए, तो जिन निकायों से उनकी डिमांड थी, उन्हें प्रचार के लिए वहां भेजा गया। अपने आक्रामक तेवरों के बीच प्रीतम कभी-कभी अपने को संभालने की कोशिश भी करते दिखते हैं। कहते हैं-मैने पूरी कोशिश की है। यदि फिर भी हमारे नेता सुधार के लिए कोई सीख देते हैं तो उसका अगली बार के लिए ध्यान रखा जाएगा। 
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‘कुंजवाल जी की तो कहीं मांग ही नही थी’
कांग्रेस की अंदरूनी घमासान के बीच कांग्रेस अध्यक्ष प्रीतम सिंह के सामने पूर्व स्पीकर गोविंद सिंह कुंजवाल भी हैं। ज्यादा समय नहीं बीता है, जबकि जिला और महानगर कमेटियों के गठन पर कुंजवाल ने सवाल उठाकर प्रीतम की घेराबंदी की थी। बात कुंजवाल के इस्तीफे तक भी पहुंच गई थी। इस बार फिर से कुंजवाल ने कुछ सवाल उठाए हैं तो प्रीतम भी बेहद तल्खी से जवाब देने में पीछे नहीं हैं। प्रीतम का कहना है कि पूरे चुनाव में कुुंजवाल जी की तो कहीं मांग ही नहीं थी। एक सवाल के जवाब में प्रीतम ये कहने से नहीं चूकते कि कुंजवाल जी तो बोलते ही रहते हैं।

मैं तो खुद परीक्षार्थी, अपने को क्या नंबर दूं 
प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह नगर निकाय चुनाव में पार्टी के प्रदर्शन को शानदार बता रहे हैं। मगर जहां तक उनसे जुड़ा सवाल है, वह कुछ कहने को तैयार नहीं है। प्रीतम सिंह का कहना है कि चुनाव में वह एक परीक्षार्थी रहे, वह क्या बता सकते हैं कि उन्हें कितने नंबर मिले हैं।

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गैरसैंण में बढ़ें सुविधाएं, फिर हो विधानसभा सत्र : भट्ट 

सरकार के गैरसैंण में शीतकालीन सत्र नहीं करवाने पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट ने कहा कि वहां पहले सुविधाएं विकसित होनी चाहिए, इसके बाद सत्र होने चाहिए। केवल सत्र करवाने से कुछ नहीं होगा। उन्होंने कहा कि भाजपा ने ही गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाने का प्रयास करने की बात कही है। इस दिशा में हम आगे भी बढ़ रहे हैं। वहां दो ढाई साल में सुविधाएं विकसित हो जाएंगी। इसके बाद सत्र के दौरान सारा सरकारी अमला ले जाने में होने वाली परेशानियों से बचा जा सकता है। उधर, प्रदेश अध्यक्ष के बयान के बाद विपक्ष ने भाजपा पर गैरसैंण विरोधी होने का आरोप मढ़ दिया है। 

भट्ट ने कहा कि पिछली बार भी जब सत्र बुलाया गया था, तो मेरे स्तर से मुख्यमंत्री को पहले ढांचागत सुविधाएं विकसित करने का सुझाव दिया गया था। चूंकि वह पहले ही सत्र करवाने का आश्वासन दे चुके थे, इसलिए सरकार ने सत्र आयोजित किया। वहां जब सत्र के लिए जाते हैं तो तमाम परेशानियां होती हैं। वहां सुविधाओं का इतना अभाव है कि ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों को पानी तक मुहैय्या नहीं होता। यह मेरा व्यक्तिगत विचार है कि जब तक पूरी तरह से सुविधाएं नहीं विकसित हों, सत्र नहीं करवाया जाए। सुविधाएं विकसित करने के लिए प्रदेश सरकार पूरी गंभीरता से जुटी है। अगले कुछ वर्षों में वहां पर्याप्त सुविधाएं हो जाएंगी। उन्होंने कहा कि उनकी मंशा गैरसैंण की अनदेखी की नहीं बल्कि उसे विकसित करने की है। उसे सही दिशा में विकसित करने लिए भाजपा सरकार की कोशिशों का नतीजा आएगा।
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