- सगंध पौध केंद्र ने छह उत्पादों को भारतीय, यूरोपियन व आस्ट्रेलियन पेटेंट के लिए किया आवेदन
- पेटेंट मिलने के बाद व्यावसायिक कारोबार के लिए सगंध पौध केंद्र से लेनी होगी अनुमति
अमर उजाला ब्यूरो
देहरादून। सगंध पौध केंद्र सेलाकुई ने लंबे शोध व अनुसंधान के बाद सगंध फसलों से तैयार छह एरोमा उत्पादों को पेटेंट के लिए आवेदन किया है। पेटेंट मिलने के बाद एरोमा उत्पादों का कारोबार बढ़ेगा। इसके साथ व्यावसायिक कारोबार के लिए कंपनियों को सगंध पौध केंद्र से अनुमति लेनी होगी।
सगंध पौध केंद्र ने भंगजीरा से ओमेगा कैप्सूल, दालचीनी से एंटीबायोटिक कैप्सूल, कुंजा से एंटी डैंड्रफ व तिमरु से परफ्यूम तैयार किया है। इन एरोमा उत्पादों को तैयार करने में सगंध पौध केंद्र ने कई साल तक शोध के साथ तकनीक को विकसित किया है। कोई अन्य राज्य व देश इस तकनीकी की नकल न करे। इसके लिए सगंध पौध केंद्र ने पेटेंट के लिए आवेदन किया है। पेटेंट से उत्तराखंड के एरोमा उत्पादों को पहचान मिलेगी। इसके अलावा बड़े स्तर पर कारोबार को बढ़ावा मिलेगा। कोई परफ्यूम या कास्मेटिक कंपनियों को इन एरोमा उत्पाद बनाने से पहले सगंध पौध केंद्र की अनुमति लेनी होगी।
सगंध पौध केंद्र के निदेशक नृपेंद्र चौहान ने बताया कि संस्थान की ओर से भंगजीरा के तेल से ओमेगा कैप्सूल बनाने की तकनीक, दालचीनी से एंटी बायोटिक, कुंजा एंटी डैंड्रफ व तिमरु परफ्यूम को पेटेंट के लिए भारतीय, यूरोपियन व ऑस्ट्रेलियन पेटेंट संस्थानों में आवेदन किया गया।
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भंगजीरा ओमेगा कैप्सूल को मिल चुका यूएस पेटेंट
सगंध पौध केंद्र ने भंगजीरा से ओमेगा कैप्सूल तैयार किया है। इसे यूएस पेटेंट मिल चुका है। भारत में अभी तक मछली के तेल और कॉड लीवर ऑयल से ओमेगा कैप्सूल बनाए जाते हैं, लेकिन अब शाकाहारियों के लिए ओमेगा कैप्सूल का विकल्प मिला है। पहाड़ों में भंगजीरा के बीज का घरेलू इस्तेमाल चटनी बनाने और मसाले के रूप में किया जाता है। अब भंगजीरा के तेल से ओमेगा कैप्सूल भी तैयार हो रहे हैं।