पहले उन्होंने बदरीनाथ, जोशीमठ और फिर ऋषिकेश में आमरण अनशन किया। अनशन की शुरूआत उन्होंने 24 जून को की थी। तीन दिन पहले से वे जल भी त्याग चुके हैं। उन्होंने कहा कि उनका अनशन स्वामी सानंद के अनशन के समर्थन में है और अब वह मातृसदन में ही रहकर उसी कमरे में अनशन करेंगे जहां स्वामी सानंद ने अनशन किया था।
स्वामी शिवानंद, जल पुरुष रोजेंद्र सिंह, पर्यावरणविद रवि चोपड़ा, अधिवक्ता अरुण भदौरिया और हिंदू क्रांति दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजीव चौधरी आदि के आग्रह पर गोपालदास ने जल तो ग्रहण कर लिया, लेकिन गंगा की अविरलता की मांग पूरी होने तक अनशन जारी रखने की बात कही।
गोपालदास के अनशन की सूचना मिलते ही जिला और पुलिस प्रशासन में हड़कंप मच गया। खुफिया विभाग ने उच्च अधिकारियों को जानकारी दी तो अधिकारी संत गोपालदास के अनशन को समाप्त कराने के तरीके तलाशते नजर आए।
मातृसदन के ब्रह्मचारी दयानंद ने बताया कि संत गोपालदास अब यहीं अनशन करेंगे। गोपालदास के साथ आए गंगा आह्वान के संयोजक हेमंत ध्यानी ने बताया कि गोपालदास वर्ष 2011 में स्वामी निगमांनद के बलिदान से पहले मातृसदन में ही काफी समय तक रहे।
उस समय उन्होंने स्वामी निगमानंद की काफी सेवा की थी। स्वामी निगमानंद के बलिदान से ही उन्हें गंगा और पर्यावरण के प्रति कुछ कर गुजरने की प्रेरणा मिली। बाद में वे गुहाना हरियाणा चले गए जहां उन्होंने गौचरान की भूमि बचाने को बड़ा आंदोलन चलाया।
बीते जून में उत्तराखंड की यात्रा पर आने के दौरान उन्होंने हिमालय में तबाही का मंजर देखा तो हिमालय और गंगा को बचाने के लिए 24 जून से अनशन पर बैठ गए।