सात सड़कें वर्ष 2005 में स्वीकृत हुईं थी, जबकि पांच सड़कें वर्ष 2006 की हैं। दो सड़कें वर्ष 2004 में स्वीकृत हुई थी। इन 30 प्रोजेक्टों में सड़कों के निर्माण, उनका डामरीकरण, सुधारीकरण के कार्य होने थे। इनके लिए कुल 292.04 करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृत हुई थी।
राज्य में 30 लोक निर्माण विभाग की 30 सड़कों पर करोड़ों रुपये खर्च हो चुके हैं, लेकिन सालों बाद भी ये पूरी नहीं हो पाई हैं। इनमें से कुछ सड़कें तो पांच से भी अधिक वर्ष से अधूरी पड़ी हैं। बुधवार को विधानसभा के पटल पर भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (कैग) ने उत्तराखंड सरकार के वित्तीय वर्ष 2020-21 के विनियोग और वित्त लेखे रखे।
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वित्त लेखे में उल्लेख है कि लोक निर्माण विभाग की 30 सड़कें पांच वर्ष या उससे अधिक से समय से अधूरी हैं। इनमें सात सड़कें वर्ष 2005 में स्वीकृत हुईं, जबकि पांच सड़कें वर्ष 2006 की हैं। दो सड़कें वर्ष 2004 में स्वीकृत हुई थी। इन 30 प्रोजेक्टों में सड़कों के निर्माण, उनका डामरीकरण, सुधारीकरण के कार्य होने थे। इनके लिए कुल 292.04 करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृत हुई थी। मार्च 200-21 तक इन सड़कों पर 241.58 करोड़ रुपये धनराशि खर्च भी हो चुकी थी। करीब 50.64 करोड़ की धनराशि लंबित थी।
872 करोड़ के उपयोगिता प्रमाण पत्र नहीं दिए
प्रदेश सरकार ने वित्तीय वर्ष के दौरान जिन कार्यों के लिए विभागों को अनुदान राशि दी, उन्होंने उस अवधि में उपयोगिता प्रमाण पत्र जमा नहीं किए। राज्य सरकार के वित्त लेखा रिपोर्ट के अनुसार, विभागों ने 872.65 करोड़ की धनराशि के कार्यों के उपयोगिता प्रमाणपत्र (यूसी) नहीं दिए। इनमें वर्ष 2018-19 में 5.46 करोड़ लागत के तीन, 2019-20 में 20.82 करोड़ के आठ, वर्ष 2020-21 में 846.37 करोड़ के सबसे अधिक 108 उपयोगिता प्रमाण पत्र नहीं दिए गए।
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यूसी देने में मुख्य चूक करने वाले विभाग
विभाग
वर्ष
धनराशि
प्रतिशत
पंचायती राज विभाग
2017-18
5.20
95.24
शहरी विकास
2017-18
0.26
4.76
पंचायती राज
2018-19
20.16
96.83
शहरी विकास
2018-19
0.66
3.17
पंचायती राज
2019-2
650.41
76.85
शहरी विकास
2019-20
195.96
23.15
एक साल में खुले बाजार से उठाया 6200 का कर्ज
वित्त लेखों के अनुसार, राज्य सरकार ने वित्तीय वर्ष 2020-21 के दौरान 6200 करोड़ का रुपये का ऋण खुले बाजार से उठाया। अप्रैल में 1000 करोड़, सितंबर में 1500 करो, अक्टूबर में 1200 र्को, जनवरी 2021 में 500 करोड़, मार्च में 2000 करोड़ रुपये का कर्ज लिया।