कार्यक्रम में मौजूद वन मंत्री हरक सिंह रावत व अन्य
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मेघालय और तमिलनाडु के बाद अब उत्तराखंड में गज यात्रा निकाली जाएगी। भारतीय वन्य जीव संस्थान में सोमवार को वन मंत्री हरक सिंह ने यात्रा की प्रतीक प्रतिमा का अनावरण किया। यह यात्रा हाथियों के कॉरिडोर में निकाली जाएगी। इसमें आम लोगों के साथ ही जनप्रतिनिधियों को भी शामिल किया जाएगा।
इस अभियान से जुड़ीं डा. प्रज्ञा पांडे के मुताबिक केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय की ओर से यह मुहिम 2017 में शुरू की गई थी। इस वर्ष इसके तहत मेघालय और तमिलनाडु में यह यात्रा निकाली जा चुकी है। मेघालय में पांच हाथी कॉरिडोर हैं। पूरे देश में 111 हाथी कॉरिडोर हैं। इनमें से 11 कॉरिडोर उत्तराखंड में हैं।
गज यात्रा के तहत कॉरिडोर के आसपास की मानव आबादी सहित राज्य की विशिष्ट हस्तियों और जनप्रतिनिधियों से बात की जाएगी। इनको कॉरिडोर की हाथियों के लिए उपयोगिता के बारे में बताया जाएगा और हाथी संरक्षण के लिए जागरूक किया जाएगा।
उत्तराखंड में हाथियों के लिए बनेगा रेस्क्यू सेंटर
1839 से अधिक हाथियों को संभाल रहे उत्तराखंड में अब हाथियों के लिए भी रेस्क्यू सेंटर बनेगा। पीसीसीएफ जयराज के मुताबिक रेस्क्यू सेंटर के लिए करीब 100 एकड़ जमीन की व्यवस्था की जा रही है। इसके लिए केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय से भी बात की गई है। हाल ही में वन विभाग को हाईकोर्ट के आदेश पर कुछ पालतू हाथियों की देखरेख करनी पड़ रही है। वन विभाग इन हाथियों को राजाजी पार्क में नहीं रख पा रहा है और न ही उन्हें उनके मालिकों को सौंप पा रहा है।
...गनर भाग गए, मै अकेला रह गया
हाथियों का मानव बस्तियों की ओर रुख करने पर चिंता जाहिर कर रहे मंत्री हरक सिंह ने अपने साथ घटी एक घटना का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि एक बार वह कोटद्वार से लैंसडौन जा रहे थे। हरक के मुताबिक हाथी सड़क पर आया तो जाम लग गया और उनकी फ्लीट के सुरक्षा कर्मी गाड़ी का दरवाजा खोलकर भाग गए। वे अपनी जगह से हिल भी नहीं पाए। यह तो अच्छा हुआ कि हाथी वाहन को छूकर निकल गया लेकिन उसने गाड़ी से कोई छेड़छाड़ नहीं की।
हाथी तब देखा, जब बसपा में शामिल हुआ
वन मंत्री हरक के मुताबिक पहाड़ पर रहने की वजह से उन्होंने कभी हाथी देखा ही नहीं था। 90 के दशक में बसपा से चुनाव लड़ा तो पहली बार हाथी देखा। हाथी पहाड़ चढ़ नहीं सकते और उन्होंने तय किया था कि हाथी को पहाड़ चढ़ाएंगे। तराई और मैदान में हाथियों की संख्या अधिक है और सारा विकास भी यहीं हो रहा है।