बता दें कि प्रशांत राही माओवादी विचारधाराओं से प्रेरित पांच से ज्यादा संगठनों में सक्रिय रहा था। राही सबसे पहले साल 2004 में कुमाऊं में पहली बार माओवादी शिविर चलाने के बाद पुलिस के राडार पर आया था।
इसके बाद उसे पत्नी समेत ऊधमसिंहनगर जिले से गिरफ्तार कर लिया गया था। वर्तमान में राही गढ़चिरौली (महाराष्ट्र) जेल में उम्रकैद की सजा काट रहा है।
सूत्रों के मुताबिक प्रशांत राही जेल से ही माओवाद की वैचारिक लड़ाई लड़ रहा है। हाल ही में पुणे पुलिस की दबिश में कई संदिग्ध दस्तावेज मिले थे। उनमें प्रशांत राही का एक पत्र भी है। प्रशांत राही ने माओवादियों के प्रतिबंधित शीर्ष संगठन की सेंट्रल कमेटी को एक सुझाव दिया है।
सूत्रों के मुताबिक पत्र में लिखा गया है कि अब माओवादी विचारधारा वाले नेताओं को जेलों से छुड़ाने को कानूनी लड़ाई लड़नी होगी। उसने देशभर की जेलों में बंद नेताओं की हालत पर सर्वे कराने को भी कहा है। पत्र में राही ने 45 लाख रुपये इस लड़ाई के लिए जरूरी बताए हैं।
बताया जा रहा है कि सेंट्रल कमेटी ने इस रकम को मंजूर भी कर लिया है। एक अधिकारिक सूत्र ने बताया कि प्रशांत राही मानता है कि माओवादी विचारधारा से प्रेरित लोगों के साथ जेलों में बुरा सुलूक किया जा रहा है। इसलिए वह अपने लोगों से इसका सर्वे करा इसकी रिपोर्ट तैयार कराना चाहता है। इस रिपोर्ट को उसने इंटरनेशनल पीपल्स ट्रिब्यूनल (आईपीटी) में भेजने की बात भी पत्र में कही है।
बताया जा रहा है कि सर्वे करने के बहाने देशभर में माओवादियों की सक्रियता बढ़ सकती है। ऐसे में पुलिस और इंटेलीजेंस हर स्तर पर तैयार रहने का दावा कर रही है। बता दें कि उत्तराखंड के कुमाऊं इलाके में माओवादियों के कनेक्शन मिलते रहेे हैं। प्रशांत राही के अलावा यहां से इनामी माओवादी नेता हेम मिश्रा को भी गिरफ्तार किया गया था। इसके अलावा तीन माह पूर्व ऊधमसिंहनगर पुलिस ने भी दो माओवादी नेताओं को गिरफ्तार किया था।