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खुलासाः एक हजार करोड़ पास कराकर सो गई उत्तराखंड सरकार

Wed, 08 Mar 2017 09:06 AM IST
कृष्णेंदु कुमार/ अमर उजाला, देहरादून
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सीएम हरीश रावत - फोटो : AmarUjala
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बजट की कमी का रोना रोने वाली प्रदेश सरकार के अफसरों ने विकास कार्यों के लिए मिले लगभग एक हजार करोड़ रुपये में से एक धेला भी खर्च नहीं किया।
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ऊर्जा, आपदा, वन और स्वास्थ्य विभाग से संबंधित इन योजनाओं को विश्व बैंक, एशियन डेवलपमेंट बैंक (एडीबी) और जापान इंटरनेशनल कारपोरेशन (जेआईसीए) से बजट मिला था। इससे कई महत्वपूर्ण योजनाओं को पूरा किया जाना था। अब जब यह पैसा लैप्स होने जा रहा है, तो अब जाकर शासन संबंधित विभागों को चेतावनी पत्र जारी कर रहा है।

केंद्र सरकार की सिफारिश के बाद बाह्य सहायतित योजनाओं (ईएपी) के लिए वर्ल्ड बैंक, एडीबी और जेआईसीए ने चालू वित्त वर्ष (2016-17) के दौरान प्रदेश के 11 विभागों को विभिन्न योजनाओं के लिए बजट दिया था। इन 11 विभागों में चार ने आवंटित बजट से एक पैसा भी खर्च नहीं किया है।
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ऊर्जा विभाग से संबंधित उत्तराखंड जल विद्युत निगम लिमिटेड (यूजेवीएनलएल) को जल विद्युत उत्पादन के लिए 243.91 करोड़ रुपये का बजट एडीबी ने स्वीकृत किया था। इसी तरह से आपदा प्रबंधन विभाग को उत्तराखंड इमरजेंसी असिस्टेंट प्रोग्राम (यूईएआर) के तहत निर्माण कार्य कराने के लिए एडीबी ने 610 करोड़ रुपये स्वीकृत किए।

उत्तराखंड हेल्थ सिस्टम डेवलपमेंट प्रोजेक्ट के तहत 10 करोड़ रुपये की सहायता

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वन विभाग के उत्तराखंड वन संस्थान प्रबंधन परियोजना को जेआईसीए से 120 करोड़  रुपये का बजट स्वीकृत किया गया था। वन विभाग ने 60 करोड़ का बजट संस्तुत भी कराया, लेकिन खर्च एक पैसा भी नहीं किया। इसी तरह से स्वास्थ्य विभाग को वर्ल्ड बैंक से उत्तराखंड हेल्थ सिस्टम डेवलपमेंट प्रोजेक्ट के तहत 10 करोड़ रुपये की सहायता मिली थी।

अब जब वित्त वर्ष के समाप्त होने में कुछ दिन शेष बचे हैं तो शासन को याद आ रहा है कि करोड़ों रुपये की राशि लैप्स हो जाएगी और अगले वित्त वर्ष के दौरान इन विभागों को ईएपी के मद में बजट हासिल करने में दिक्कत आएगी। सचिव वित्त अमित नेगी ने इस विभागों को निर्देश दिए हैं कि वो पांच दिन के अंदर राज्य योजना आयोग को अवगत कराएं कि अब तक आवंटित राशि खर्च क्यों नहीं की गई है।

अगले वित्त वर्ष के लिए पैसा मिलने पर संकट
इन विभागों द्वारा 31 मार्च तक ईएपी का पैसा खर्च नहीं किए जाने या फिर कुछ राशि अवशेष रह जाने की स्थिति में अगले वित्त वर्ष के लिए बजट हासिल करने में दिक्कत आएगी। क्योंकि इस स्थिति में केंद्र से इसके लिए सैद्धांतिक सहमति नहीं मिल पाएगी। सचिव वित्त अमित नेगी ने इन विभागों के अधिकारियों को जारी किए गए निर्देश में इस तथ्य का हवाला दिया है।
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मुख्य सचिव करेंगे स्थिति की समीक्षा

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चार विभागों द्वारा ईएपी के तहत आवंटित बजट को खर्च नहीं करने पर वित्त विभाग अपनी चिंता तो जाहिर कर चुका है। विभागों द्वारा बजट खर्च नहीं किए जाने का कारण बताए जाने के बाद मुख्य सचिव पूरी स्थिति की समीक्षा करेंगे।

विभाग  -   परियोजना     -   डोनर एजेंसी  -     बजट    -   संस्तुति -   खर्च
ऊर्जा    -  पावर प्रोजेक्ट्स  -  एडीबी       -    243.91 करोड़  - शून्य  -   शून्य
आपदा   -  यूईएपी        -    एडीबी    -    610 करोड़  -  शून्य  -   शून्य
वन     -   यूवीएसपीपी    -   जेआईसीए  -   120 करोड़   -    60 करोड़ - शून्य
स्वास्थ्य  -   यूएचएसडीपी  -   वर्ल्ड  बैंक   -   10  करोड़   -    04 करोड़ - शून्य
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