राज्यसभा सांसद तरुण विजय पर हमले का असर पोखरी गांव में रविवार को आयोजित होने वाले धार्मिक अनुष्ठान पर भी पड़ा। आयोजकों को यहां सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालुओं के उमड़ने की उम्मीद थी, लेकिन गिरफ्तारी के डर से अधिकांश लोगों ने कार्यक्रम से दूरी बनाए रखी। शिलगुर देवता के गर्भगृह में प्रवेश के दौरान करीब 150 लोग ही मौजूद थे।
बीते शुक्रवार को धार्मिक अनुष्ठान के पहले दिन गांव में बवाल हो गया था। बेकाबू भीड़ ने राज्यसभा सांसद तरुण विजय और उनके साथ आए लोगों पर पथराव कर दिया था। इस दिन भी सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचे थे। मामले में राजस्व पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ दंगा भड़काने के साथ ही विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया हुआ है।
राजस्व पुलिस, रेग्युलर पुलिस के सहयोग से आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए तबाड़तोड़ दबिश दे रही है। लोग इस बात से आशंकित हैं कि कहीं राजस्व पुलिस उन्हें गिरफ्तार ना कर ले। यहीं, नहीं पोखरी के साथ ही आसपास के गांव में रहने वाले पुरुषों ने गिरफ्तारी के डर से इधर-उधर शरण ले रखी हैं।
कार्रवाई के डर से बनाई दूरी
मंदिर के पुजारी विरेंद्र शर्मा ने बताया कि शाम चार बजे देवता को गर्भगृह में प्रवेश कराया गया है। इस दौरान गांव के ही लोग मौजूद रहे। 36 साल बाद देवता गांव में आए थे। जिसे लेकर गांव वालों में पूर्व तक भारी उत्साह था। अंतिम दिन के अनुष्ठान में 10 से 15 हजार श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद थी, लेकिन गिरफ्तारी के डर से बहुत कम लोग अनुष्ठान में शामिल हुए।
धार्मिक अनुष्ठान में अठगांव, तपलाड़, बनखत, मनखत, द्वारखत, बिसलाड़, बौंदूर, भंखोली समेत नौ खतों से लोग जुटने थे। इसके साथ ही पड़ोसी जिले उत्तरकाशी से भी श्रद्धालुओं को आना था, लेकिन कार्रवाई के डर से श्रद्धालुओं ने अनुष्ठान से दूरी बनाए रखी।