भारत-चीन युद्ध के 32 साल बाद अब आखिरकार इस गांव को अब लीज की भूमि का किराया मिल सकेगा। रक्षा मंत्रालय ने इस प्रस्ताव पर मुहर लगा दी है।
रक्षा मंत्रालय ने भारत-चीन सीमा से लगे सीमांत गांव मलारी की लीज भूमि के किराए का निपटारा कर दिया है। वर्षों से किराए की आस लगाए बैठे ग्रामीणों को अब शीघ्र ही भूमि का 78 लाख का भुगतान हो सकेगा। देवप्रयाग में पत्रकारवार्ता में रक्षा मंत्रालय की रक्षा संपदा अधिकारी भावना सिंह ने उक्त जानकारी दी।
जोशीमठ तहसील के सीमावर्ती मलारी गांव में पंद्रह दिन के शिविर के बाद लौट रही रक्षा संपदा अधिकारी सोमवार देर रात देवप्रयाग पहुंची थी। उन्होंने बताया कि सेना ने भारत चीन युद्ध के बाद 1974 में जोशीमठ से 61 किमी दूर सीमांत गांव मलारी में ग्राम पंचायत के काश्तकारों की 3005 नाली 10 मुठ्ठी भूमि लीज पर ली थी।
तब तल्ला मल्ला मलारी गांव की इस भूमि पर सेना ने छावनी बनाई थी। कहा कि वर्तमान में यहां सेना की 14 बिहार बटालियन की यूनिट है। काश्तकारों की ओर से लगातार भूमि किराए की मांग की जा रही थी। मगर खाता-खतौनी परीक्षण और काश्तकारों की सूची तैयार न होने से किराए का मामला लंबित पड़ा था।